Saturday, 07 March 2026

जयपुर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, आचार्य आकाश गौतम ने बताया भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व


जयपुर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, आचार्य आकाश गौतम ने बताया भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व

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जयपुर। शहर के मारुति नगर, दादी का फाटक स्थित पावन परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन से जुड़े सूरज सोनी ने बताया कि कथा से पूर्व महिलाओं ने श्रीमद्भागवत जी के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली। सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में भाग लेते हुए भक्ति गीतों और जयघोष के साथ कथा स्थल तक पहुंचकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

भुतेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री 108 बालकिशन जी महाराज की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती और भजनों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वृंदावन के केशी घाट से पधारे सुप्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता आचार्य आकाश गौतम महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

आचार्य आकाश गौतम महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्ग है। उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व को समझाते हुए कहा कि जब मनुष्य के जीवन में ये तीनों गुण जागृत होते हैं, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है और व्यक्ति ईश्वर के मार्ग पर अग्रसर होता है।

कथा के दौरान आचार्य जी ने धुंधुकारी और गोकर्ण की प्रसिद्ध कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से धुंधुकारी जैसे पापी का भी मोक्ष हो गया था। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धा और समर्पण भाव से कथा का श्रवण किया जाए तो यह आत्मा को पवित्र कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

आचार्य आकाश गौतम ने यह भी कहा कि कथा सुनने वाला श्रोता और कथा कहने वाला वक्ता दोनों का स्वभाव पवित्र और विनम्र होना चाहिए। श्रोता को एकाग्रचित्त होकर श्रद्धा के साथ कथा सुननी चाहिए, वहीं वक्ता को निष्काम भाव से भगवान की महिमा का वर्णन करना चाहिए। तभी कथा का वास्तविक फल प्राप्त होता है।

उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के भीतर छिपे अज्ञान को दूर करता है और उसे भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। इससे जीवन में शांति, संतोष और आध्यात्मिक जागरण का अनुभव होता है। कथा के समापन पर आचार्य जी ने सभी श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति में निरंतर लगे रहने और नियमित रूप से भागवत कथा का श्रवण करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर बृहस्पति धाम के महंत नरेंद्र जी, पूर्व पुलिस महानिदेशक बीएल सोनी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव के साथ कथा का रसपान किया। भगवान के नाम संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

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