



बालोतरा जिले के पचपदरा में बन रही एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) परियोजना की शुरुआत एक बार फिर टल गई है। पहले इसे अगस्त 2025 के बाद जनवरी 2026 में चालू करने के दावे किए गए थे, लेकिन अब इसकी संभावित शुरुआत मार्च 2026 तक खिसक गई है। प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल पचपदरा रिफाइनरी को बालोतरा सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक और आर्थिक विकास की धुरी माना जा रहा है। इस रिफाइनरी के शुरू होने से बालोतरा-पचपदरा से लेकर जोधपुर तक औद्योगिक कॉरिडोर विकसित होने की योजना है, लेकिन परियोजना में लगातार हो रही देरी के कारण उद्योग, निवेश और रोजगार की संभावनाएं फिलहाल अधर में लटकी हुई हैं।
रिफाइनरी से जुड़ी उम्मीदों को उस समय और बल मिला था जब राज्य सरकार के ‘राइजिंग राजस्थान’ निवेश अभियान के दौरान हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू हस्ताक्षर किए गए थे। इन प्रस्तावों के तहत क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि रिफाइनरी परियोजना की समयसीमा बार-बार आगे बढ़ने से इन निवेश प्रस्तावों का क्रियान्वयन भी अभी तक जमीन पर नहीं उतर पाया है और कई निवेशक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
रिफाइनरी के साथ प्रस्तावित विशाल पेट्रोकेमिकल जोन को पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक नक्शे को बदलने वाला माना जा रहा है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में 500 से अधिक उद्योग स्थापित हो सकते हैं, जिससे करीब 20 से 25 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी कोर्स कर रहे युवाओं ने भी इस परियोजना को बड़े अवसर के रूप में देखा था, लेकिन परियोजना की शुरुआत में हो रही देरी से युवाओं और स्थानीय लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पचपदरा रिफाइनरी शुरू होने के बाद पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक आधारित उद्योगों को कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा, जिससे प्लास्टिक, फाइबर, पेंट, केमिकल, पैकेजिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों में तेजी से औद्योगिक विस्तार हो सकता है। फिलहाल रिफाइनरी की शुरुआत टलने से पश्चिमी राजस्थान में प्रस्तावित औद्योगिक विकास की गति धीमी पड़ गई है और क्षेत्र के लोग तथा निवेशक अब मार्च 2026 की संभावित शुरुआत पर नजरें टिकाए हुए हैं।