Sunday, 01 March 2026

उदयपुर कथित वीडियो कांड पर सियासत गरमाई, आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल के बयान से बढ़ी हलचल


उदयपुर कथित वीडियो कांड पर सियासत गरमाई, आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल के बयान से बढ़ी हलचल

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जयपुर/उदयपुर। उदयपुर में भाजपा नेताओं से जुड़े कथित वीडियो कांड को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। कांग्रेस द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) भी खुलकर मैदान में उतर आई है। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बाद नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए तीखे बयान दिए हैं।

आरएलपी प्रमुख बेनीवाल ने दावा किया कि कथित सीडी में सीएमओ से जुड़े लोग, कैबिनेट मंत्री और पार्टी संगठन के कुछ पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में उनके पास वीडियो पहुंच सकते हैं और यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित ‘एपस्टीन फाइल’ जैसा बड़ा खुलासा साबित हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि “उदयपुर फाइल्स” सामने आने के बाद भाजपा की छवि पर बड़ा असर पड़ सकता है।

आरएलपी प्रमुख बेनीवाल ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि संभवतः इस मामले में कोई राजनीतिक सौदेबाजी हो रही है। उनके अनुसार, सीडी देने वाले व्यक्ति ने स्वयं यह कहा है कि कांग्रेस नेताओं को सामग्री देकर गलती कर दी। बेनीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उदयपुर के एक पूर्व वरिष्ठ नेता को दरकिनार कर राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले में पुलिस की भूमिका और सीडी को नष्ट करने के प्रयास की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी ओर भाजपा के तथाकथित आरोपी पक्ष ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता दिल्ली तक सक्रिय होकर संगठन के भीतर अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि बिना ठोस प्रमाण के अफवाहों के आधार पर पार्टी और स्थानीय नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा खेमे का दावा है कि संबंधित प्रकरण में पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया था और कथित वीडियो को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे प्रमाणित नहीं हैं। पार्टी के भीतर और बाहर चल रही लॉबिंग को लेकर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर संगठन ने इस विषय पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।

पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक हमला बता रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले की गंभीरता तय करेंगी।

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