Saturday, 28 February 2026

एमजेआरपीयू में एआईयू वेस्ट जोन अंतर-विश्वविद्यालयी महिला शतरंज प्रतियोगिता संपन्न, डॉ. बाबा साहेब मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी बनी विजेता


एमजेआरपीयू में एआईयू वेस्ट जोन अंतर-विश्वविद्यालयी महिला शतरंज प्रतियोगिता संपन्न, डॉ. बाबा साहेब मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी बनी विजेता

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जयपुर। महात्मा ज्योति राव फूले विश्वविद्यालय (एमजेआरपीयू) के अचरोल कैंपस में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) वेस्ट जोन अंतर-विश्वविद्यालयी महिला शतरंज प्रतियोगिता का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। 23 से 27 फरवरी तक चली इस पांच दिवसीय प्रतियोगिता में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र के लगभग 90 विश्वविद्यालयों की करीब 450 महिला खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र की डॉ. बाबा साहेब मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी विजेता रही, जबकि शिवाजी यूनिवर्सिटी कोल्हापुर ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सावित्री फुले पुणे यूनिवर्सिटी तीसरे और महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज चौथे स्थान पर रही।

समापन समारोह में सीआईडी में पुलिस अधीक्षक एवं आईपीएस ज्येष्ठा मैत्रेयी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सौम्या संघमित्रा और विश्वविद्यालय के चेयरमैन निर्मल पंवार मौजूद रहे। अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों को पदक, ट्रॉफी और प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रतियोगिता के अंपायर, रेफरी, कोच और एआईयू पदाधिकारियों का भी अभिनंदन किया।

विश्वविद्यालय के चेयरमैन निर्मल पंवार ने देश के विभिन्न प्रांतों से आई खिलाड़ियों और खेल अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी खेल में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण सहभागिता और अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि शतरंज संयम, निर्णय क्षमता और एकाग्रता का खेल है, जो जीवन में मानसिक मजबूती और संतुलन प्रदान करता है। यह केवल खेल नहीं बल्कि जीवन दर्शन है, जिसे हर विद्यार्थी को सीखना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि महिला खिलाड़ियों को उत्कृष्ट मंच उपलब्ध कराना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है।

मुख्य अतिथि आईपीएस ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कहा कि शतरंज की तरह जीवन में भी चुनौतियों का सामना संयम, अनुशासन और समर्पण से किया जा सकता है। उन्होंने महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कहा कि महिला स्वयं शक्ति का स्वरूप है और समाज को उसकी पहचान व सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शतरंज भारत की प्राचीन देन है, जो केवल खेल नहीं बल्कि गौरव और आदर्श का प्रतीक है।

डॉ. सौम्या संघमित्रा ने अपने संबोधन में कहा कि शतरंज हमें दूसरे व्यक्ति की सोच और रणनीति को समझने की क्षमता प्रदान करता है, जो सामान्य जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण कौशल है। उन्होंने कहा कि यह खेल खिलाड़ियों में विश्लेषणात्मक सोच और धैर्य विकसित करता है।

प्रतियोगिता के सफल आयोजन से एमजेआरपीयू ने महिला खेल प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करते हुए खेल और शिक्षा के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

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