



राजस्थान विधानसभा में पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की नीतियों और ग्रामीण विकास योजनाओं को लेकर जमकर हमला बोला और कहा कि गांव का आम व्यक्ति चाहता है कि सरकार उसके हितों का भी ध्यान रखे। उन्होंने कहा कि पंचायतीराज व्यवस्था देश की लोकतांत्रिक नींव है और कांग्रेस सरकार ने ही त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत किया था।
जूली ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि देश में पंचायतीराज व्यवस्था का शुभारंभ पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नागौर से किया था और संविधान में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव हर पांच वर्ष में अनिवार्य रूप से होने चाहिए। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव समय पर नहीं होने के कारण केंद्र से मिलने वाली करीब 3000 करोड़ रुपये की राशि अटक गई है, जिससे ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।
मनरेगा योजना को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस योजना ने देशभर में रोजगार के अवसर पैदा किए, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे कमजोर करने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा में राज्यों की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत थी और 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब योजनाओं की प्रभावशीलता कम की जा रही है। जूली ने सवाल उठाया कि सरकार 125 दिन रोजगार देने की बात करती है, जबकि इसके लिए लगभग 21 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, तो अतिरिक्त रोजगार गारंटी का वादा कैसे पूरा होगा।
टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार केंद्र से संसाधन लाने की बात कही जाती है, लेकिन प्रदेश को कोई ठोस आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब 10 प्रतिशत वित्तीय योगदान देने में कठिनाई हो रही है, तो 40 प्रतिशत हिस्सेदारी कैसे दी जाएगी।
किसानों के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की और कहा कि पहले कृषि कानून लाए गए और अब अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील के जरिए किसानों के हितों से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि गरीब और किसानों की उपेक्षा का राजनीतिक परिणाम जनता भविष्य में जरूर देगी।