Monday, 02 March 2026

ज्ञान, नवाचार और संस्कार से बनेगा विकसित भारत 2047: विज्ञान महोत्सव में बोले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी


ज्ञान, नवाचार और संस्कार से बनेगा विकसित भारत 2047: विज्ञान महोत्सव में बोले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) में आयोजित राजस्थान विज्ञान महोत्सव के उद्घाटन समारोह में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विकसित भारत 2047 के निर्माण में ज्ञान, नवाचार और संस्कार की भूमिका को निर्णायक बताया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग राजस्थान सरकार, विज्ञान भारती राजस्थान तथा एमएनआईटी जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के समग्र विकास, नवाचार और मानवीय मूल्यों से जुड़ी जीवन दृष्टि है।

अपने संबोधन में देवनानी ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा में महिला शक्ति सृजन, ज्ञान और नवाचार की मूल प्रेरणा रही है। कार्यक्रम की थीम “विज्ञान में महिलाएं विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक” पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में नारी को सृजन और ज्ञान की मूल शक्ति माना गया है। उन्होंने गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी प्राचीन विदुषियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं ने वेद, दर्शन, प्रकृति विज्ञान, चिकित्सा, कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने आधुनिक भारत की महिला वैज्ञानिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि कल्पना चावला, टेसी थॉमस, रितु करिधाल और वनिथा जैसी वैज्ञानिकों ने विश्व स्तर पर भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि अवसर और संसाधन मिलने पर भारतीय बेटियां वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता स्थापित कर रही हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

देवनानी ने युवाओं को विज्ञान और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि राज्य की युवा प्रतिभाएं इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने तथा बेटियों को विज्ञान शिक्षा में अधिक अवसर देने की आवश्यकता बताई।


उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा जब ज्ञान को संस्कारों से, विज्ञान को मूल्यों से और तकनीक को मानवता से जोड़ा जाएगा। विज्ञान का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रगति नहीं बल्कि मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान होना चाहिए।

राजस्थान विज्ञान भारती के सचिव मेघेंद्र शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्टअप नवाचारकों और नीति-निर्माताओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। इस अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वी. सरवण कुमार सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

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