Thursday, 19 February 2026

जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्वआईएएस सुबोध अग्रवाल की हाईकोर्ट में याचिका,एसीबी की एफआईआर रद्द करने की मांग


जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्वआईएएस सुबोध अग्रवाल की हाईकोर्ट में याचिका,एसीबी की एफआईआर रद्द करने की मांग

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में नाम सामने आने के बाद पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की तलाश कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई अब न्यायालय पहुंच गई है। सुबोध अग्रवाल ने एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और एफआईआर को रद्द करने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है, जिससे मामले की दिशा तय होने की संभावना है।

याचिका में क्या कहा गया

याचिका में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की ओर से दावा किया गया है कि उनका कार्यकाल 18 अप्रैल 2022 से पीएचईडी (जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग) में शुरू हुआ था।

याचिका के अनुसार गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल फर्मों ने कथित रूप से इरकॉन (IRCON) के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर टेंडर पहले ही हासिल कर लिए थे।इन फर्मों को दिए गए करीब 95 प्रतिशत वर्क ऑर्डर तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता वाली वित्त समिति द्वारा स्वीकृत किए थे।याचिकाकर्ता के कार्यकाल में केवल 10 प्रतिशत से भी कम मूल्य के टेंडर स्वीकृत हुए। याचिका में यह भी कहा गया कि एसीबी ने इन तथ्यों की पर्याप्त जांच नहीं की।

सरकार को नुकसान नहीं होने का दावा

अधिवक्ता दीपक चौहान के अनुसार याचिकाकर्ता की अध्यक्षता वाली वित्त समिति ने स्वीकृत टेंडरों के बावजूद दोनों फर्मों को कोई भुगतान नहीं किया।इसलिए उनके कार्यकाल में सरकार को किसी प्रकार की आर्थिक हानि नहीं हुई।

इरकॉन से ईमेल के माध्यम से फर्जी प्रमाण पत्र की जानकारी मिलने के बाद हाई लेवल कमेटी गठित की गई।जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों फर्मों के टेंडर निरस्त किए गए।संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया। अधिकारी विशाल सक्सेना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई।

 एसीबी की कार्रवाई पर सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसीबी ने कार्रवाई के लिए अधिकारी विशाल सक्सेना के बयानों को आधार बनाया, जबकि उन्हीं के खिलाफ पूर्व में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि व्यक्तिगत द्वेष के कारण उनके खिलाफ बयान दिए गए, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

अब क्या होगा आगे

अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि एसीबी की एफआईआर प्रथम दृष्टया उचित है या नहीं जांच जारी रहेगी या एफआईआर निरस्त की जाएगी। जेजेएम घोटाला पहले ही राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में बड़ा मुद्दा बन चुका है। हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई इस मामले में अहम मोड़ साबित हो सकती है


Previous
Next

Related Posts