



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सवालों पर बुधवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया। अचरोल (जयपुर) में सैटेलाइट अस्पताल और सीएचसी भवन निर्माण को लेकर उठे सवाल पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
कांग्रेस विधायक प्रशांत शर्मा ने अचरोल क्षेत्र में सैटेलाइट अस्पताल और सीएचसी भवन निर्माण की स्थिति को लेकर सरकार से जवाब मांगा। इस पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रस्तावित सैटेलाइट अस्पताल हेरिटेज बिल्डिंग क्षेत्र में होने के कारण वहां नए निर्माण की अनुमति संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को नई जमीन आवंटन के लिए पत्र लिखा जा चुका है और जमीन मिलते ही बेहतर स्थान पर अस्पताल विकसित किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के जवाब पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सवाल आमेर नहीं बल्कि अचरोल क्षेत्र से संबंधित था और मंत्री भ्रमित हो गए। इस पर मंत्री ने कहा कि बार-बार खड़े होकर हस्तक्षेप करने से अन्य विधायकों के समय पर असर पड़ता है।
जवाब में जूली ने हल्के अंदाज में कहा कि वे मंत्री के प्रति “अधिक प्रेम” के कारण खड़े हुए थे क्योंकि मंत्री आमेर और अचरोल में अंतर स्पष्ट नहीं कर पा रहे थे।
जूली ने यह भी पूछा कि अचरोल में स्वीकृत सैटेलाइट अस्पताल को शिफ्ट क्यों किया गया और क्या सरकार उसे वापस उसी स्थान पर स्थापित करेगी। इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायक नाराज हो गए।
सरकार की ओर से संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और सामूहिक रूप से वॉकआउट कर दिया। कुछ समय के लिए सदन का वातावरण पूरी तरह राजनीतिक टकराव में बदल गया।
इसी दौरान नोहर क्षेत्र में बायपास सड़क के अलाइन्मेंट परिवर्तन को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और डिप्टी सीएम दीया कुमारी के बीच भी तीखी बहस हुई।
डिप्टी सीएम ने कहा कि पुराने अलाइन्मेंट पर किसानों की आपत्तियों के कारण भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी, इसलिए नया अलाइन्मेंट बनाकर कार्य शुरू किया गया है और यदि कोई शिकायत है तो जांच करवाई जा सकती है।
जूली ने सरकार के जवाब को भ्रामक बताते हुए पूछा कि किसानों का विरोध कब दर्ज हुआ, परियोजना लागत बढ़ने की जिम्मेदारी किसकी होगी और फ्लाइओवर की जगह टी-जंक्शन बनने से संभावित दुर्घटनाओं की जवाबदेही कौन लेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं, क्षेत्रीय विकास और सड़क परियोजनाओं जैसे मुद्दों पर लगातार हो रही बहस ने विधानसभा की कार्यवाही को राजनीतिक रूप से गर्म बनाए रखा। विपक्ष ने सरकार पर क्षेत्रीय उपेक्षा और अस्पष्ट जवाब देने के आरोप लगाए, जबकि सरकार ने विकास कार्यों को नियमानुसार आगे बढ़ाने का दावा किया।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में उद्योग, युवा एवं खेल विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा और सदन का माहौल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से गरमा गया। कांग्रेस विधायक अशोक चांदना ने ऑनलाइन सट्टे को युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला।
बहस के दौरान कांग्रेस विधायक अशोक चांदना ने कहा कि राजस्थान का युवा आज बेरोजगारी, नशे और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा कंपनियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को करोड़ों रुपये का राजनीतिक चंदा दिया, जबकि यही कंपनियां युवाओं का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रही हैं।
चांदना ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार ऑनलाइन सट्टे पर प्रतिबंध की बात करती है, तो यह गतिविधियां आज भी खुले तौर पर कैसे चल रही हैं। उन्होंने कहा कि गांव-गांव तक नशे और सट्टे का जाल फैल चुका है, जिससे युवाओं में कर्ज, अपराध और आत्महत्या जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि ऑनलाइन सट्टे में पैसा हारने के बाद युवा ऊंचे ब्याज पर उधार लेने को मजबूर हो जाते हैं। इससे एक खतरनाक सामाजिक तंत्र विकसित हो रहा है, जहां आर्थिक दबाव के कारण अपराध और हिंसा तक की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि अवैध ब्याज वसूली और ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।
उन्होंने पुलिस व्यवस्था पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस वास्तविक सामाजिक समस्याओं की बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त दिखाई देती है, जबकि युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी, युवाओं की समस्याओं और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों ने सदन की बहस को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। विपक्ष ने सरकार पर युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान नोहर (बीकानेर) बायपास के अलाइन्मेंट परिवर्तन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। डिप्टी सीएम एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, जिससे सदन का माहौल गर्मा गया।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने सदन में स्पष्ट किया कि बायपास का नया अलाइन्मेंट रोड सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद तय किया गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है और इससे दुर्घटनाओं की आशंका नहीं बढ़ेगी।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऐसी कोई विशेषज्ञ समिति तक गठित नहीं की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार ने तकनीकी समिति बनाकर वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिया है।
दीया कुमारी ने यह भी कहा कि किसानों की आपत्तियों के कारण पहले प्रस्तावित अलाइन्मेंट पर जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी, इसलिए नया मार्ग निर्धारित किया गया और परियोजना की लागत में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह गंभीर विषय है और पहले भी इस पर ध्यान आकर्षण प्रस्ताव लगाया जा चुका है। उन्होंने पूछा कि किसानों का विरोध कब और किस तारीख को दर्ज हुआ तथा यदि लागत बढ़ी है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
जूली ने चिंता जताई कि पहले जहां फ्लाइओवर प्रस्तावित था, वहां अब ‘टी जंक्शन’ बनने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बहस के दौरान भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी द्वारा सरकार को धन्यवाद देने पर जूली ने व्यंग्य करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र को परियोजना में कोई विशेष लाभ नहीं मिला, फिर धन्यवाद किस बात का दिया जा रहा है। इस पर सदन में हल्की नोकझोंक और राजनीतिक टिप्पणियां भी हुईं।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी के रूप में दीया कुमारी ने आदिवासी क्षेत्रों के पर्यटन विकास पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेणेश्वर धाम और मानगढ़ धाम सहित धार्मिक स्थलों को जोड़ते हुए ट्राइबल सर्किट विकसित किया जाएगा। विभिन्न परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की जा रही है और कुछ प्रस्ताव स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में घोषणाएं करने की बजाय योजनाओं को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण तरीके से लागू करना चाहती है।
भरतपुर के बहनेरा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन निर्माण को लेकर भी सदन में बहस हुई। आरएलडी विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने मौजूदा स्थान की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कमेटी से अंडरटेकिंग लेने की मांग की।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि भवन निर्माण तकनीकी मानकों के अनुसार ही होगा और यदि बेहतर स्थान उपलब्ध कराया जाए तो सरकार उस पर भी विचार करेगी। उन्होंने पूर्व सरकार पर दबाव में घोषणाएं करने का आरोप लगाया।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अवैध खनन, गोशालाओं को अनुदान, राशन व्यवस्था, युवाओं के रोजगार और ‘राइजिंग राजस्थान’ निवेश जैसे मुद्दों पर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। उद्योग, युवा एवं खेल विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे के कार्यकाल की तुलना करते हुए राजनीतिक हमला तेज कर सकते हैं।