



जयपुर। जयपुर के हृदय स्थल गणगौरी बाजार स्थित सरकारी अस्पताल का निर्माण कार्य पिछले करीब 29 महीनों से ठप पड़ा हुआ है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बड़ी योजना अधूरी रह गई है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रही बहुमंजिला अस्पताल बिल्डिंग का स्ट्रक्चर लगभग पूरा होने के बावजूद फिनिशिंग कार्य शुरू नहीं हो पाया है। परियोजना के ठहराव के कारण न केवल लागत में वृद्धि हो रही है, बल्कि शहर के हजारों मरीज आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से वंचित बने हुए हैं।
जयपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अक्टूबर 2021 में 52 करोड़ रुपए की लागत से जी+3 मंजिला अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया गया था। योजना के अनुसार यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2023 तक पूरा होना था, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक विवादों के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया।
नई सरकार बनने के बाद स्थानीय विधायक बालमुकुंदाचार्य ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया और पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की जांच समिति गठित की गई। समिति ने रिपोर्ट में कमियां दूर कर कार्य पुनः शुरू करने की सिफारिश की, लेकिन इसके बावजूद परियोजना दोबारा शुरू नहीं हो सकी।
निर्माण कार्य रुकने का एक बड़ा कारण अस्पताल के नए गेट को लेकर उत्पन्न विवाद भी बना। चौगान स्टेडियम की ओर निकाले गए प्रवेश द्वार पर खेल विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया।
इसके बाद से स्मार्ट सिटी प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच निर्णय लंबित होने के कारण परियोजना फाइलों में अटक गई है। स्मार्ट सिटी अधिकारियों का कहना है कि विधायक की अनुमति मिलते ही काम फिर शुरू कर दिया जाएगा।
प्रस्तावित अस्पताल भवन में 286 नए बैड स्थापित किए जाने थे। इसके साथ ही जनरल मेडिसिन, सर्जरी, गायनी सहित विभिन्न विशेषज्ञ विभागों की नई यूनिट शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं शुरू होने से पुराने शहर के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन परियोजना ठप रहने से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार रुक गया है।
करीब दो वर्षों से निर्माण कार्य बंद रहने के कारण प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधूरी बिल्डिंग लंबे समय तक खाली रहने से संरचनात्मक नुकसान का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर के बीचोंबीच स्थित अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाता तो मरीजों का दबाव अन्य बड़े अस्पतालों पर कम हो सकता था।
स्थानीय विधायक बालमुकुंदाचार्य का कहना है कि गुणवत्ता सुधार के बाद कार्य शुरू करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वहीं स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिशाषी अभियंता नरेंद्र गुप्ता का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के निर्देश मिलते ही निर्माण कार्य पुनः शुरू कर दिया जाएगा।
अब सवाल यह है कि करोड़ों की सार्वजनिक परियोजना कब तक प्रशासनिक निर्णयों का इंतजार करती रहेगी और शहरवासियों को प्रस्तावित स्वास्थ्य सुविधाएं आखिर कब मिलेंगी।