Thursday, 19 February 2026

राजस्थान में IAS प्रमोशन विवाद पर सियासत तेज, गहलोत के आरोपों पर राठौड़ का पलटवार


राजस्थान में IAS प्रमोशन विवाद पर सियासत तेज, गहलोत के आरोपों पर राठौड़ का पलटवार

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जयपुर। राजस्थान में अन्य सेवाओं से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में होने वाले पदोन्नति (Promotion) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रमोशन प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता पर सवाल उठाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने पलटवार करते हुए गहलोत पर निशाना साधा और कहा कि वे “ट्वीट-ट्वीट (अब X) खेलने” की राजनीति कर रहे हैं।

UPSC और केंद्र की मंजूरी के बाद भी अटके प्रमोशन

जानकारी के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अन्य सेवाओं से IAS पदोन्नति के लिए चार अधिकारियों के नाम तय कर दिए हैं। इन नामों पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन राज्य सरकार स्तर पर पिछले लगभग एक महीने से पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुए हैं।

पिछले वर्ष 22 और 23 दिसंबर को UPSC बोर्ड द्वारा कुल 20 अधिकारियों के इंटरव्यू लिए गए थे। इनमें केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के दामाद अजय कुमार आर्य सहित विभिन्न सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। प्रमोशन प्रक्रिया में देरी को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

गहलोत ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब UPSC और केंद्र सरकार नामों को स्वीकृति दे चुकी है, तो राज्य स्तर पर प्रमोशन रोकने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक नियुक्तियों में योग्यता के बजाय “पसंदीदा चेहरों” या राजनीतिक निकटता को प्राथमिकता देना नियमों के खिलाफ है। गहलोत ने कहा कि चयन प्रक्रिया में देरी सरकार की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है और योग्यता आधारित नियुक्तियां तुरंत जारी की जानी चाहिए।

राठौड़ का जवाब – प्रमाण हों तो पत्र लिखें

गहलोत के बयान के बाद पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गहलोत बिना तथ्य और प्रमाण के आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास ठोस सबूत हैं तो वे सोशल मीडिया पोस्ट करने के बजाय मुख्यमंत्री को औपचारिक पत्र लिखें।

राठौड़ ने कहा कि अस्पष्ट आरोपों से प्रशासनिक प्रक्रिया पर अनावश्यक संदेह पैदा किया जा रहा है।

प्रमोशन प्रक्रिया पर उठ रहे नए सवाल

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य सेवा से IAS चयन में अक्सर वही अधिकारी आगे बढ़ते हैं जिन्हें सरकार की स्वीकृति प्राप्त होती है। ऐसे में प्रमोशन आदेशों में देरी ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नई बहस छेड़ दी है।

इंटरव्यू देने वाले प्रमुख अधिकारी

UPSC इंटरव्यू में शामिल अधिकारियों में प्रमुख रूप से —

  • अजय कुमार आर्य (PWD सेवा)

  • डॉ. मंजू विजय (गृह विभाग)

  • डॉ. राजेश कुमार व्यास

  • बलविंदर सिंह

  • सुमन मालीवाल

  • नर्मदा इंदौरिया

  • डॉ. प्रीतपाल सिंह कालरा

  • डॉ. रश्मि गुप्ता

  • धर्मेंद्र कुमार

  • केसर सिंह

  • मनीष माथुर

  • मुरार सिंह जाड़ावत

  • निधि सिंह, विवेक चौहान

  • विनेश सिंघवी

  • कार्तिकेय मिश्रा

  • रणजीत सिंह चुंडावत

  • श्याम सुंदर जानी

  • डॉ. सुभाष वर्मा

  • सुरेश वर्मा

अब निगाहें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं कि लंबित प्रमोशन आदेश कब जारी किए जाते हैं।

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