



जयपुर। अजमेर के चर्चित फोटो ब्लैकमेलिंग कांड में पीड़िताओं को न्यायालय के आदेशों के डेढ़ वर्ष बाद भी पूर्ण मुआवजा नहीं मिल सका है। गुरुवार को राजस्थान विधानसभा में भाजपा विधायक संदीप शर्मा के सवाल के लिखित जवाब में राज्य सरकार ने जानकारी दी कि 17 पीड़िताओं में से अब तक केवल 2 को ही मुआवजा राशि प्रदान की गई है। शेष पीड़िताओं और उनके परिजनों द्वारा मुआवजा लेने में रुचि नहीं दिखाने का दावा किया गया है।
विधि विभाग के अनुसार, अजमेर की पॉक्सो मामलों की स्पेशल कोर्ट संख्या-2 ने 20 अगस्त 2024 को अपने फैसले में 17 पीड़िताओं को 7-7 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए थे। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया था कि प्रत्येक पीड़िता को 30 दिन के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। हालांकि अब तक केवल दो पीड़िताओं को ही कुल 14 लाख रुपये (सात-सात लाख रुपये) का भुगतान किया गया है।
सरकारी जवाब के मुताबिक 14 पीड़िताओं को मुआवजा दिया जाना अभी शेष है, जबकि एक पीड़िता का निधन हो चुका है। पहचान छिपाकर रह रही पीड़िताओं को मुआवजा न मिलने के प्रश्न पर सरकार ने स्पष्ट किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने परिजनों से संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन अब तक किसी ने मुआवजा प्राप्त करने में रुचि नहीं दिखाई है।
सरकार ने यह भी कहा है कि न्यायालय के आदेशों की पालना में आगामी तीन वर्षों तक शेष पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे। यदि कोई पीड़िता तीन वर्ष की अवधि के बाद भी मुआवजा लेने की इच्छुक होगी, तो उसे भुगतान किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर पीड़ितों को न्यायिक आदेशों के बावजूद समय पर राहत न मिलने के प्रश्न को सामने लाता है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही और तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है।