



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में आज सूरतगढ़ से विधायक डूंगर राम गेदर ने प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर जोरदार और तथ्यपरक वक्तव्य देते हुए सरकार से तीखे सवाल किए। अपने भाषण में उन्होंने कहा, “आंकड़ों में उलझाकर आप कितने दिन तक चलेंगे? कागजों पर खींच दी विकास की रेखाएँ, खाली जेब में छुपे दर्द को कौन देखेगा।” उन्होंने “डबल इंजन” सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब बड़ा इंजन ही फेल हो रहा है तो विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
आर्थिक असमानता के मुद्दे पर बोलते हुए विधायक ने कहा कि देश के शीर्ष 10 प्रतिशत लोगों के पास 65 प्रतिशत संपत्ति केंद्रित है, जबकि 90 प्रतिशत जनता के हिस्से में केवल 35 प्रतिशत संपत्ति है। उन्होंने इसे “एक पैर बर्फ पर और दूसरा अंगारों पर रखकर औसत ठीक बताने” जैसी स्थिति बताया। आर्थिक समीक्षा 2024-25 और 2025-26 के आंकड़ों में कथित विरोधाभास का जिक्र करते हुए उन्होंने पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
बीकानेर में बिश्नोई समाज के महापड़ाव और खेजड़ी संरक्षण कानून को लेकर दिए गए आश्वासन की याद दिलाते हुए गेदर ने कहा कि साधु-संतों का अपमान राजस्थान की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत की रक्षा को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया।
सूरतगढ़ न्यायालय परिसर की जर्जर स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए विधायक ने कहा कि वर्ष 1961 में निर्मित भवन में वर्तमान में चार अदालतें संचालित हो रही हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा भवन को जर्जर घोषित किए जाने तथा उच्च न्यायालय द्वारा बार-बार स्वीकृति मांगे जाने के बावजूद बजट जारी नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही दर्शाता है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी 2026 से वकील और न्यायालय कर्मी धरने पर हैं, जिससे न्यायिक कार्य बाधित हो रहा है और पक्षकारों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने नए न्यायालय भवन के लिए तत्काल बजट स्वीकृति तथा दूसरा अपर जिला न्यायालय खोलने की मांग की।
इसके अतिरिक्त, विधायक ने कृषि विश्वविद्यालयों के बजट में कटौती, लखपति दीदी योजना के आंकड़ों में विसंगतियों, मुख्यमंत्री मंगल पशु बीमा योजना के क्रियान्वयन में शून्य प्रगति तथा सहकारी समितियों में करोड़ों रुपये के कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
साथ ही, सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे पर उन्होंने सदन में स्थगन प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया। गेदर ने स्पष्ट कहा कि जनहित से जुड़े इन सभी विषयों पर सरकार को जवाब देना होगा और जरूरत पड़ी तो जनता की आवाज सड़क से सदन तक बुलंद की जाएगी।