



दस प्रस्तावित बाइपास में हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय का कोहला–नवां बाइपास (₹ 200 करोड़) भी शामिल है। सरकार के अनुसार, अलाईनमेंट तय कर डीपीआर तैयार की जा चुकी है और प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए हैं। भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत धारा-11 तक पूरी की जा चुकी है। शहरी क्षेत्रों में उच्च लागत को देखते हुए अब भूमि के बदले भूमि का विकल्प अपनाया जा रहा है।
यह निर्णय बजट घोषणा 2024-25 के तहत किए गए वादों के अनुरूप है। प्रस्तावित बाइपास परियोजनाओं का विवरण इस प्रकार है:
भरतपुर: दो बाइपास, कुल लागत ₹ 350 करोड़
सीकर: NH-52 से SH-08 बाइपास, ₹ 90 करोड़
हनुमानगढ़: कोहला–नवां बाइपास, ₹ 200 करोड़
धौलपुर: NH-23 से NH-11B (₹ 154.64 करोड़) और NH-44 से SS-2A (₹131.76 करोड़)
झुंझुनूं: मंडावा–झुंझुनूं रोड से NH-11/NH-08 (₹ 61 करोड़) और उदयपुरवाटी रोड से चिड़ावा रोड (₹ 100 करोड़)
करौली: मण्डरायल–करौली–हिण्डौन–मानवा बाइपास, ₹ 85 करोड़
सुजानगढ़ (चूरू): NH-58 से मेगा हाईवे तक, ₹ 75 करोड़
सरकार का मानना है कि भूमि आवंटन मॉडल से परियोजनाओं की लागत और समय दोनों में दक्षता आएगी, साथ ही स्थानीय निकायों के माध्यम से शहरी बुनियादी ढांचे को गति मिलेगी। हालांकि, भूमि अधिग्रहण से जुड़े सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर संतुलित समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहेगा।