



जयपुर। जयपुर डेयरी की ‘सरस मायरा योजना’ अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर में दुग्ध उत्पादकों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बनती जा रही है। जयपुर सरस डेयरी द्वारा शुरू की गई इस सामाजिक पहल की सफलता को देखते हुए मध्यप्रदेश की सांची डेयरी ने भी अपने यहां दुग्ध उत्पादकों के लिए मायरा योजना लागू कर दी है। केंद्र सरकार स्तर पर भी इस योजना को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि यह मॉडल अन्य राज्यों में भी विस्तार पा सकता है।
जयपुर डेयरी ने पिछले 10 महीनों में जयपुर और दौसा जिलों के 504 दुग्ध उत्पादकों की बेटियों के विवाह में कुल ₹1.50 करोड़ की मायरा राशि प्रदान की है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर दुग्ध उत्पादक परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मंगलवार को जयपुर दुग्ध संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश पूनिया और प्रबंध संचालक मनीष फौजदार ने बिंदायका जोन की दुग्ध समिति लोछब की ढाणी की दुग्ध उत्पादक चंदादेवी की पुत्री कल्पना लोछब के विवाह अवसर पर ‘सरस मायरा’ भरते हुए ₹21,000 का चेक सौंपा। इस दौरान उत्पादक परिवार की माता और पुत्री को वस्त्र भेंट कर पारंपरिक कन्यादान की रस्म भी निभाई गई।
कार्यक्रम में आसपास की दुग्ध समितियों के सचिव, पदाधिकारी, दुग्ध उत्पादक और संघ के अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने भी मायरा राशि भेंट कर सामाजिक सहयोग का संदेश दिया। योजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादक परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। जयपुर डेयरी का मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सहकारिता आंदोलन की संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।