



बीकानेर। बीकानेर में मंगलवार को पुष्करणा समाज का बहुप्रतीक्षित ‘ओलिंपिक सावा’ उत्साह और पारंपरिक रंगत के साथ संपन्न हुआ। ऐतिहासिक परकोटे में एक ही दिन और एक ही मुहूर्त में 150 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। इस अवसर पर सबसे पहले पहुंचने वाले दूल्हे को बाइक देकर सम्मानित किया गया, जबकि सबसे पहले आने वाले दुल्हन पक्ष को साड़ी और नकद राशि भेंट की गई।
नत्थूसर गेट पर शाम करीब साढ़े सात बजे पहुंचे घनश्याम पुरोहित ने सबसे पहले दूल्हे के रूप में पहुंचकर इंतजार खत्म किया। उन्हें कर्मवान फाउंडेशन की ओर से पुरस्कार स्वरूप मोटरसाइकिल प्रदान की गई। वहीं बारह गुवाड़ में सावित्री देवी कल्ला फाउंडेशन द्वारा 51 हजार रुपये का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इस बार सावे का मुहूर्त देर रात होने के कारण दूल्हों के आगमन में देरी रही। नत्थूसर गेट से मोहता चौक तक तीन बड़े मंचों पर दूल्हों का इंतजार किया गया।
यह सावा करीब 500 वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विवाह जैसे सामाजिक आयोजन का आर्थिक बोझ कम करना है। पहले यह आयोजन चार वर्ष में एक बार होता था, बाद में इसे दो वर्ष में एक बार आयोजित किया जाने लगा। पुराने शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया, जहां पूरे दिन विवाह से जुड़ी पारंपरिक रस्में और सांस्कृतिक गतिविधियां होती रहीं।
ज्योतिष एवं वास्तुविद राजेश व्यास के अनुसार इस परंपरा का मूल उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देना है। सीमित मेहमानों और सामूहिक आयोजन के कारण विवाह खर्च नियंत्रित रहता है। परकोटे में मांगलिक गीतों की गूंज और रोशनी की जगमगाहट के बीच पूरा शहर बाराती बना नजर आया।