



जयपुर। पंजाब एंड सिंध बैंक की बहरोड़ और नीमराना (जिला अलवर) स्थित शाखाओं में बड़े पैमाने के वरिष्ठ प्रबंधक महेश कुमार की मिली भगत से किसानों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर ऋण लेकर ₹ 16.94 करोड़ की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है।
बहरोड और कोटपूतली के पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई के निर्देश पर बैंक ने वर्ष 2016 से 2022 के बीच 141 किसानों द्वारा कथित रूप से की गई धोखाधड़ी, गबन, कूटरचना और धन की साइफनिंग के आरोपों को लेकर बहरोड के पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की है। फिर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिर में बैंक ने इस पूरे प्रकरण में कुल ₹16.94 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ है, जो ऋण स्वीकृति और डिस्बर्समेंट के दौरान हुआ।
बैंक ने एफआईआर में बताया कि संबंधित किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (एनिमल हसबेंड्री) और व्यावसायिक ऋण लेने के लिए कथित रूप से भ्रामक और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। ऋण स्वीकृति के बाद राशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के बजाय निजी लाभ के लिए किया और निर्धारित समय पर पुनर्भुगतान से जान बूझकर परहेज किया। बैंक ने एफ आईआर में बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि ऋण खातों में वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं किया गया, जिससे बैंक को गंभीर आर्थिक क्षति हुई।
बैंक ने एफ आईआर में बताया कि ऋण के बदले किसानों ने फसलें, पशु आहार और चारा हाइपोथिकेट किए गए थे और राजस्थान कृषि ऋण संचालन (कठिनाइयों का निवारण) अधिनियम, 1974 की धारा 6 के तहत कृषि भूमि पर चार्ज सृजित किया था। व्यावसायिक ऋणों के लिए स्टॉक को भी सुरक्षा के रूप में हाइपोथिकेट किया। इसके बावजूद आंतरिक जांच और ऑडिट में यह उजागर हुआ कि कई मामलों में सुरक्षा और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर राशि की हेराफेरी की गई।
बैंक ने एफ आईआर में बताया कि वर्ष 2022 में कराई गई आंतरिक जांच/ऑडिट के बाद बैंक ने इस मामले में आपराधिक कार्रवाई का निर्णय लिया। बैंक का कहना है कि यह एक संगठित बैंक धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें उधारकर्ताओं के साथ-साथ संबंधित स्तरों पर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। बैंक ने जांच एजेंसियों से त्वरित कार्रवाई, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही और नुकसान की वसूली सुनिश्चित करने की मांग की है।