



बीकानेर। बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन मंगलवार को 9 वें दिन भी लगातार जारी रहा। बिश्नोई धर्मशाला के सामने चल रहे क्रमिक अनशन में 100 से अधिक पर्यावरण प्रेमी और आंदोलनकारी शामिल हैं। खेजड़ी के संरक्षण और कटाई रोकने की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को समर्थन देने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं बायतू विधायक हरीश चौधरी बीकानेर पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे।
हरीश चौधरी ने कहा कि खातेदारी अधिकार कानून के तहत किसान को उस जमीन का अधिकार दिया गया, जिस पर वह मजदूरी करता था, और उसी अधिनियम में खेजड़ी को किसान की संपत्ति माना गया था। उन्होंने अधिकारियों की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब दिल्ली या जयपुर में अधिकारियों से बात होती है, तो वे कहते हैं कि एक खेजड़ी के बदले दूसरी खेजड़ी लगा दी जाए। जबकि सच्चाई यह है कि एक खेजड़ी को तैयार होने में करीब 60 साल लग जाते हैं। एक इंसान अपने पूरे जीवन में एक खेजड़ी को बड़ा होते हुए भी नहीं देख पाता। ऐसे में कटे हुए खेजड़ी के पेड़ की भरपाई संभव नहीं है।
हरीश चौधरी ने कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली, संस्कृति और पर्यावरण संतुलन का आधार है। उन्होंने सुबह नाल एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद सीधे आंदोलन स्थल पर जाकर आंदोलनकारियों से संवाद किया और उनके संघर्ष को जायज बताया।
धरना स्थल पर मौजूद आंदोलन से जुड़े नेताओं ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आश्वासन के बावजूद महापड़ाव समाप्त नहीं किया जाएगा। आंदोलन से जुड़े रामगोपाल बिश्नोई ने कहा कि जब तक खेजड़ी संरक्षण को लेकर ठोस कानून नहीं बनता, तब तक महापड़ाव और क्रमिक अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संभागीय आयुक्त के आश्वासन से कोई समाधान नहीं निकलेगा। संत समाज ने जयपुर में राजस्व सचिव से स्पष्ट आदेश जारी करवाने की मांग की है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी राजस्थान की पहचान और पर्यावरण सुरक्षा की रीढ़ है। यदि इसके संरक्षण के लिए कठोर कानून नहीं बनाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।