Friday, 13 February 2026

पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के सर्कुलेशन पर FIR, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल जांच में जुटी


पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के सर्कुलेशन पर FIR, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल जांच में जुटी

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नई दिल्ली। पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की अब तक अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ के कथित सर्कुलेशन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज की है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन न्यूज फोरम्स पर सामने आई उन जानकारियों के बाद दर्ज किया गया, जिनमें दावा किया गया था कि किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सार्वजनिक रूप से सर्कुलेट हो रही है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस किताब के प्रकाशन के लिए अभी तक संबंधित सरकारी प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी मिली कि इसी शीर्षक वाली एक टाइप-सेट किताब की PDF कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर उपलब्ध पाई गई। पुलिस को आशंका है कि यह वही कॉपी हो सकती है, जिसे प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान तैयार किया गया था।

पब्लिशर की कॉपी लीक होने की आशंका

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में यह संदेह जताया गया है कि यह सामग्री पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार की गई कॉपी से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा, कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर किताब के कवर को इस तरह प्रदर्शित किया गया, मानो यह किताब खरीद के लिए उपलब्ध हो, जबकि आधिकारिक रूप से इसका प्रकाशन नहीं हुआ है।

स्पेशल सेल कर रही है जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने इस संबंध में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बिना अनुमति और अप्रकाशित किताब की सामग्री सार्वजनिक कैसे हुई, PDF किन स्रोतों से लीक हुई और इसके पीछे कौन-कौन लोग या संस्थाएं शामिल हैं।

संसद में किताब दिखने से मामला और गरमाया

यह FIR ऐसे समय दर्ज की गई है, जब 4 फरवरी को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को संसद परिसर में इस किताब की एक कॉपी दिखाते हुए देखा गया था। राहुल गांधी ने उस दौरान कहा था कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में आएंगे, तो वे उन्हें यह किताब भेंट करेंगे। इसके बाद इस किताब को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई थीं।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला कॉपीराइट उल्लंघन, आधिकारिक गोपनीयता के उल्लंघन या किसी अन्य आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है या नहीं।

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