Thursday, 05 February 2026

विधानसभा में सीएम का खुला चैलेंज: ‘5 साल बनाम 2 साल’ पर बहस को तैयार, दस्तावेज सदन में रखे


विधानसभा में सीएम का खुला चैलेंज: ‘5 साल बनाम 2 साल’ पर बहस को तैयार, दस्तावेज सदन में रखे

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष को खुली चुनौती दे दी। सीएम ने कहा कि विपक्ष ने सरकार के दो साल बनाम कांग्रेस के पांच साल के कार्यकाल पर बहस की चुनौती दी थी, जिसे वे स्वीकार करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस संबंध में सभी दस्तावेज सदन के पटल पर रख रहे हैं और स्पीकर से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर अलग से बहस का समय तय किया जाए।

सीएम ने कहा, “पांच साल बनाम दो साल पर बहस के लिए मैं पूरी तरह तैयार हूं। तय कर दीजिए कि कब बहस करनी है।” मुख्यमंत्री के जवाब के बाद विधानसभा की कार्यवाही 11 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई।

जवाब के दौरान दो बार हंगामा

मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने दो बार हंगामा किया। पहला हंगामा एसआईआर को लेकर हुआ, जब सीएम ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन बताया। इसके बाद ‘दो साल बनाम पांच साल’ की बहस की चुनौती को लेकर कांग्रेस विधायकों ने फिर से विरोध दर्ज कराया।

नाम लिए बिना डोटासरा पर तीखा हमला

सीएम ने नाम लिए बिना कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वे मंत्री थे और कोई परेशानी लेकर जाता था, तो उसे किसी “बाड़े” का रास्ता दिखा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि 3 फरवरी को सत्तापक्ष के एक विधायक ने उस बाड़े का इतिहास सदन में रख दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा, “आज मैं किसी व्यक्ति की नहीं, उस प्रवृत्ति की बात कर रहा हूं, जो कुर्सी जाते ही ज्ञान का ग्रंथ बन जाती है। जब ऊंट खड़ा रहता है, तब तक आदमी को रेत नहीं दिखती। एक हाथ में हुकुम और दूसरे हाथ में रिश्तेदार की सिफारिश चलती थी। इम्तिहान सवाल-पत्र में नहीं, पहले जेब में उतरते थे।”

‘घी पी लिया, अब उपदेश दे रहे हैं’

सीएम ने कहा कि कांग्रेस शासन में मेहनती युवा खड़े रह जाते थे और तब न युवाओं की याद आती थी, न नैतिकता की। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “कल तक जो लोग घी पीने में व्यस्त थे, वे आज कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार है और युवा देश का भविष्य हैं। पहले घी पी लिया, अब उपदेश दे रहे हैं। सत्ता हाथ में थी तो मुंह में माखन था, सत्ता गई तो ज्ञान की मटकी भर गई।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईमानदारी कोई रिटायरमेंट के बाद की योजना नहीं होती, बल्कि कुर्सी पर बैठकर दिखाई जाती है। “युवाओं को भाषण नहीं, निष्पक्ष परीक्षा चाहिए,” उन्होंने जोर दिया।

अर्थव्यवस्था और कर्ज का मुद्दा

सीएम ने नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें अब भी विकास नजर नहीं आ रहा है तो वे चश्मे की व्यवस्था कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को पता था कि वे वापस नहीं आएंगे, इसलिए अर्थव्यवस्था को कमजोर कर गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकार से राज्य को 5 लाख 79 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज विरासत में मिला, लेकिन मौजूदा सरकार ने सत्ता संभालते ही अर्थव्यवस्था को गति दी है।

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