



जयपुर। राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही आज शून्यकाल से शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरा।
किसानों को कम बिजली, ज्यादा बिल की दोहरी मार: शून्यकाल में भाजपा विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने उठाया डिग्गी योजना का मुद्दा
राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान किसानों को मिल रही बिजली आपूर्ति और बढ़ते बिजली बिलों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा।
भाजपा विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने किसानों से ज्यादा बिजली बिल वसूले जाने और कम बिजली आपूर्ति को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को 24 घंटे बिजली देने का दावा कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि किसानों को मात्र 6 घंटे ही बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
अंशुमान सिंह भाटी ने विशेष रूप से इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत चल रही सामूहिक डिग्गी योजना का हवाला देते हुए बताया कि इस योजना में 30 एचपी के डिग्गी कनेक्शन पर 4400 रुपए का टैरिफ लागू है। उन्होंने गणना प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस दर से दो महीने का बिजली बिल करीब 18 हजार रुपए बनता है, जबकि सामान्य कृषि टैरिफ के तहत 0.90 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से दो महीने का बिल केवल 6 हजार रुपए के आसपास आता है।
भाटी ने कहा कि मौजूदा 4400 रुपए के डिग्गी टैरिफ के कारण किसानों को सालाना करीब 72 हजार रुपए का बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ डाल रहा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवहारिक है।
विधायक ने यह भी कहा कि एक ओर बिजली आपूर्ति कम की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी घट रही है। इसके बावजूद किसानों से अधिक पैसा वसूला जा रहा है, जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने बताया कि सामूहिक डिग्गी योजना के तहत एक डिग्गी के दायरे में 40 से 50 किसान परिवार आते हैं, यानी इस नीति से हजारों किसान प्रभावित हो रहे हैं।
अंशुमान सिंह भाटी ने सरकार से मांग की कि लिफ्ट परियोजनाओं के तहत बनी डिग्गियों पर सामान्य कृषि टैरिफ लागू किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम करना चाहती है, तो बिजली दरों और आपूर्ति दोनों में सुधार करना अनिवार्य है।
आरक्षण में बेईमानी का आरोप: कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने सरकार पर साधा निशाना
राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान आरक्षण को लेकर कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत सरकार ने वर्ष 1997 में आरक्षण का रोस्टर लागू करने का प्रावधान किया था, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से आरक्षण व्यवस्था की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और इसे लागू करने में खुली बेईमानी की जा रही है।
मनीष यादव ने कहा कि आरक्षित वर्ग के बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरियों में उनका पूरा हक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू हुए 28 साल बीत चुके हैं, फिर भी कई ऐसे विभाग हैं, जहां आज तक रोस्टर रजिस्टर तक नहीं बनाए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रोस्टर रजिस्टर का नियमित रूप से संधारण (मेंटेनेंस) नहीं होने के कारण आरक्षित वर्ग के आरक्षण से छेड़छाड़ की जा रही है। इसका सीधा नुकसान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को हो रहा है।
कांग्रेस विधायक ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल की भर्तियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। वनपाल भर्ती और महिला सुपरवाइजर भर्ती में अनुसूचित जाति (SC) का आरक्षण शून्य कर दिया गया, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को निर्धारित 21 प्रतिशत की जगह केवल 15 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
मनीष यादव ने सरकार से सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तो फिर रोस्टर व्यवस्था को सही तरीके से लागू क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने मांग की कि सभी विभागों में रोस्टर रजिस्टर तत्काल बनाए जाएं और आरक्षण नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि आरक्षित वर्ग के युवाओं के साथ हो रहा अन्याय समाप्त हो सके।
शून्यकाल में अफसरों की गैर-मौजूदगी पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी नाराज़, व्यवस्था सुधारने के निर्देश
राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान अफसरों की लगभग पूरी गैर-मौजूदगी पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कड़ी नाराजगी जताई। शून्यकाल में उठाए जा रहे मुद्दों की जानकारी देते समय जब स्पीकर की नजर अफसर गैलरी पर पड़ी, तो वहां केवल दो अधिकारियों की मौजूदगी देखकर उन्होंने असंतोष व्यक्त किया।
स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल से कहा कि उन्होंने पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव, पर्ची और नियम 295 के तहत उठाए जाने वाले विषयों से संबंधित विभागों के अधिकारी अफसर गैलरी में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। इसके बावजूद पूरी अफसर दीर्घा खाली नजर आ रही है, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मंत्री से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आगे से ऐसी स्थिति दोबारा न हो।
स्पीकर की नाराजगी के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि आज कुछ अधिकारी अन्य आवश्यक तैयारियों में लगे हुए हैं, लेकिन भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी और निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार स्पीकर द्वारा निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी अफसर गैलरी से नदारद रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं होता।
अफसरों की गैर-मौजूदगी को लेकर सदन में उठी नाराजगी से यह साफ हो गया कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर त्वरित और स्पष्ट जवाब मिल सकें।
आज विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का अंतिम दिन है। कार्यवाही के दौरान बजट और सरकार की नीतियों पर चर्चा होगी। इस क्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली बहस में हिस्सा लेकर विपक्ष का पक्ष रखेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राज्यपाल के अभिभाषण पर चल रही बहस का औपचारिक जवाब देंगे। मुख्यमंत्री के जवाब के साथ ही राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का समापन होगा।