



अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर उठे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने ही प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मोरपाल सुमन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि सुमन का कृत्य पार्टी अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है और इस पर पार्टी जवाब चाहती है।
नोटिस में स्पष्ट शब्दों में उल्लेख किया गया है कि यदि आरोपों के संबंध में मोरपाल सुमन को कोई स्पष्टीकरण देना है तो वे आज से तीन दिन के भीतर लिखित रूप में प्रस्तुत करें। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई उनके उस पत्र के बाद की गई है, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
दरअसल कुछ दिन पहले मोरपाल सुमन ने भाजपा जिला अध्यक्ष, बारां को एक पत्र लिखकर अपनी हार की समीक्षा की थी। इस पत्र में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित बारां जिले के तीन भाजपा विधायकों और कई पार्टी पदाधिकारियों पर चुनाव हराने का गंभीर आरोप लगाया था। सुमन ने अपनी हार के लिए “भीतरघात” को जिम्मेदार ठहराया था।
पत्र में मोरपाल सुमन ने दावा किया कि ओम बिरला की पूरी टीम ने उनके विरोध में काम किया और बड़ी राशि उपलब्ध कराकर मतदाताओं को प्रलोभन दिया गया, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया की जीत में मदद मिली। उन्होंने मंत्री हीरालाल नागर पर भी आरोप लगाते हुए लिखा कि उनके व्यवसायिक साझेदार मनोज शर्मा ने नागर और मालव समाज में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में धन वितरण कराया।
इतना ही नहीं, सुमन ने बारां जिले के तीनों भाजपा विधायकों—प्रताप सिंह सिंघवी, ललित मीणा और राधेश्याम बैरवा—पर भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें चुनाव हराने का प्रयास करने का आरोप लगाया। पत्र में उन्होंने लिखा कि अंता विधानसभा क्षेत्र में यह चर्चा आम थी कि यदि वे कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को हरा देते हैं तो उनके मंत्री बनने की प्रबल संभावना है, इसी कारण तीनों विधायकों ने उनके खिलाफ काम किया।
अंता (बारां) विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15,594 वोटों के अंतर से पराजित किया था, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा तीसरे स्थान पर रहे। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थक कंवरलाल मीणा की विधायकी समाप्त होने के बाद रिक्त हुई थी। कंवरलाल मीणा को एसडीएम पर पिस्टल तानने के 20 साल पुराने मामले में सजा मिलने के बाद मई माह में उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।
भाजपा के भीतर इस घटनाक्रम को अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में कड़ा संदेश देना चाहता है।
