Monday, 02 March 2026

अंता उपचुनाव हार पर भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन का पत्र वायरल, पार्टी के भीतर भितरघात के गंभीर आरोप


अंता उपचुनाव हार पर भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन का पत्र वायरल, पार्टी के भीतर भितरघात के गंभीर आरोप

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बारां जिले की अंता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन का एक आंतरिक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिले की राजनीति में हलचल मच गई है। यह पत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष को संबोधित बताया जा रहा है, जिसमें मोरपाल सुमन ने अपनी हार के लिए सीधे तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। पत्र सामने आने के बाद संगठन के भीतर तीखी बहस शुरू हो गई है और कई असहज सवाल खड़े हो गए हैं।

मोरपाल सुमन ने पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि अंता उपचुनाव में हार केवल विपक्ष की रणनीति का परिणाम नहीं थी, बल्कि पार्टी के भीतर हुए भितरघात ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट की घोषणा में अनावश्यक देरी की गई, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम और असंतोष पैदा हुआ। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि कई प्रभावशाली नेताओं ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में काम किया, जिससे भाजपा का चुनावी गणित बिगड़ गया।

पत्र में सुमन ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के करीबी मनोज शर्मा, पूर्व विधायक हेमराज मीणा, पूर्व जिलाध्यक्ष नंदलाल सुमन, आनंद गर्ग, अंता प्रधान प्रखर कौशल, उपप्रधान धर्मेन्द्र यादव, नगर पालिका चेयरमैन रामेश्वर खंडेलवाल, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश धाकड़ और एसटी मोर्चा जिलाध्यक्ष धर्मवीर मीणा सहित कई नेताओं और पदाधिकारियों के नामों का उल्लेख किया है। सुमन का आरोप है कि इन सभी की भूमिका ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ दिया और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

इसके अलावा मोरपाल सुमन ने यह भी कहा कि अंता से टिकट के अन्य दावेदारों ने भी पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने में भूमिका निभाई। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई। कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों द्वारा संसाधनों के कथित दुरुपयोग के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

पत्र के वायरल होने के बाद भाजपा संगठन में बेचैनी का माहौल है। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इस पर संगठनात्मक स्तर पर मंथन हो सकता है।

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