Thursday, 05 February 2026

भारतीय ज्ञान परम्परा एवं भारतीय भाषाएं विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का समापन


भारतीय ज्ञान परम्परा एवं भारतीय भाषाएं विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का समापन

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जयपुर स्थित राजस्थान शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ, शाहपुरा बाग, आमेर रोड में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं राजस्थान शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भारतीय ज्ञान परम्परा एवं भारतीय भाषाएं” विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का समापन 30 जनवरी 2026 को गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा, शास्त्रीय विरासत एवं भारतीय भाषाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाना रहा।

समापन समारोह में पावन सानिध्य एवं आशीर्वाद महंत हरिशंकर दास वेदांती (सियाराम दास जी की बगीची, ढेहर का बालाजी) द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय रहे, जबकि अध्यक्षता सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के पूर्व कुलपति प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली, एनसीटीई नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. एस. के. सोहान, संस्कृत शिक्षा के सेवानिवृत्त निदेशक प्रो. सुरेन्द्र कुमार शर्मा तथा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के सह निदेशक (प्रशासन) प्रो. शीशराम उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर समापन सत्र का शुभारम्भ किया।

राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ. राजकुमार जोशी एवं संस्थान निदेशक आशीष जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. सुभाष मीना ने द्वि-दिवसीय संगोष्ठी का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्वानों एवं शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परम्परा, भारतीय भाषाओं की भूमिका, शास्त्रीय ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय पर केंद्रित अनेक शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व को संतुलित, समग्र और नैतिक जीवन-दृष्टि प्रदान करती है तथा भारतीय भाषाएं इस परम्परा की सशक्त संवाहक हैं। उन्होंने शिक्षा और शोध के माध्यम से भारतीय भाषाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने का आह्वान किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में निहित ज्ञान आधुनिक विज्ञान और समाज के लिए भी अत्यंत उपयोगी है, आवश्यकता केवल इसे समकालीन संदर्भों से जोड़ने की है।

कार्यक्रम में प्रो. आनन्द पुरोहित, प्रो. सत्यनारायण शर्मा, डॉ. दिवाकर मिश्र, डॉ. सीताराम दोतोलिया, डॉ. शालिनी सक्सेना, डॉ. कैलाश चन्द्र बुनकर, डॉ. सुभद्रा जोशी, डॉ. मीनाक्षी जोशी, जितेन्द्र कुमार सहित बड़ी संख्या में संस्कृत अनुरागी, विद्वान एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कविता भारद्वाज एवं डॉ. दिलीप कुमार पारीक ने किया।

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