Friday, 06 February 2026

हाईकोर्ट में आपातकालीन सेवाओं की पोल खुली, घायल महिला वकील को अस्पताल पहुंचाने के लिए नहीं मिला एम्बुलेंस ड्राइवर


हाईकोर्ट में आपातकालीन सेवाओं की पोल खुली, घायल महिला वकील को अस्पताल पहुंचाने के लिए नहीं मिला एम्बुलेंस ड्राइवर

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में उस समय आपातकालीन सेवाओं की गंभीर खामियां उजागर हो गईं, जब एक घायल महिला वकील को अस्पताल ले जाने के लिए उपलब्ध हाईकोर्ट एम्बुलेंस में ड्राइवर ही नहीं मिला। घटना के दौरान वकीलों ने एम्बुलेंस ड्राइवर की तलाश की, लेकिन जांच में सामने आया कि ड्राइवर उस दिन हाईकोर्ट पहुंचा ही नहीं था। हालात इतने गंभीर थे कि अंततः एक अधिवक्ता को स्वयं एम्बुलेंस चलाकर घायल महिला वकील को अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

घटना के अनुसार महिला अधिवक्ता प्रिया प्रकाश सुबह स्कूटी से हाईकोर्ट आ रही थीं, तभी हाईकोर्ट के पास उनका सड़क हादसा हो गया। चोटिल अवस्था में वे किसी तरह हाईकोर्ट की डिस्पेंसरी पहुंचीं, जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद साथी वकील रविन्द्र सिंह शेखावत और सतीश खंडेलवाल उन्हें लेकर हाईकोर्ट परिसर में खड़ी एम्बुलेंस तक पहुंचे, लेकिन एम्बुलेंस लॉक मिली और मौके पर न तो ड्राइवर था और न ही मेडिकल स्टाफ।

वकील सतीश खंडेलवाल ने बताया कि एम्बुलेंस पर चस्पा पर्ची में मेडिकल स्टाफ का फोन नंबर लिखा था, जिस पर संपर्क करने पर बताया गया कि ड्राइवर मौजूद नहीं है। जब ड्राइवर को फोन किया गया तो उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ मिला। ऐसे में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वकीलों ने स्वयं एम्बुलेंस चलाकर घायल महिला वकील को अस्पताल ले जाने का निर्णय किया। वकील रविन्द्र सिंह शेखावत ने एम्बुलेंस चलाई, जबकि सतीश खंडेलवाल ने उनकी सहायता की। घायल महिला वकील को एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जिसके बाद दोनों वकील एम्बुलेंस को वापस हाईकोर्ट परिसर में लाकर निर्धारित स्थान पर खड़ा कर गए।

इस घटना के बाद हाईकोर्ट के वकीलों में भारी नाराजगी देखी गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिस परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वकील, न्यायाधीश और आमजन मौजूद रहते हैं, वहां आपातकालीन सेवाओं का इस तरह ठप होना बेहद चिंताजनक है। वकीलों ने मांग की है कि हाईकोर्ट परिसर में आपातकालीन सेवाओं को तत्काल दुरुस्त किया जाए और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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