



जयपुर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (पूर्व में राजस्थान अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड) में बीते करीब 9 वर्षों से अंकों में हेरफेर कर भर्तियां कराने का संगठित फर्जीवाड़ा चल रहा था। एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की जांच में सामने आया है कि बोर्ड में तैनात सिपाही अनिल चौधरी और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी फर्म राभव लिमिटेड ने मिलकर पूरे सिस्टम को ‘हैक’ कर रखा था। रिपोर्ट के अनुसार, अनिल चौधरी ने अपनी पत्नी, साली, दोस्त की पत्नी सहित कई नजदीकी लोगों को नौकरी दिलाने के लिए ओएमआर शीट में बाद में नंबर बढ़वाए।
एसओजी के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट लगभग खाली छोड़ी थी। बाद में तकनीकी शाखा के कर्मचारियों की मिलीभगत से ओएमआर शीट में छेड़छाड़ कर अंक बढ़ा दिए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन अध्यक्ष बी.एल. जाटावत को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद बिना किसी आंतरिक जांच के अभ्यर्थियों को जॉइनिंग दे दी गई। सिपाही अनिल चौधरी (बेल्ट नंबर 9727) वर्ष 2018 में बोर्ड की सुरक्षा में तैनात था। उसी दौरान उसने पत्नी मीरा, साली मीना, वीरू चौधरी, कृष्ण कुमार चौधरी, सुरेंद्र और लोकेश चौधरी सहित कई लोगों के नंबर बढ़वाए।
इसी बीच जेईएन भर्ती से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस जेईएन भर्ती परीक्षा 2020 को पेपर लीक होने के कारण रद्द कर 2021 में दोबारा आयोजित किया गया था, वह परीक्षा भी लीक हुई थी। एसओजी के अनुसार, यह पेपर जगदीश उर्फ गुरु, शेरसिंह मीणा और भूपेंद्र सारण द्वारा लीक किया गया। वर्ष 2020 की परीक्षा 6 सितंबर को और पुनः परीक्षा 12 सितंबर 2021 को करवाई गई थी। जांच में अब तक 8 जेईएन की संलिप्तता सामने आ चुकी है।
एसओजी की रिपोर्ट के अनुसार, जेईएन भर्ती 2020 और 2021 के पेपर लीक का मास्टरमाइंड जगदीश उर्फ गुरु था। उसने न केवल 2020 और 2021 की जेईएन भर्ती, बल्कि मार्च 2024 में भी जेईएन 2020 और एसआई भर्ती 2021 के पेपर लीक किए। जगदीश से यह पेपर चार अलग-अलग गैंग तक पहुंचा। हर्षवर्धन मीणा ने 2020 के पेपर लीक में भूमिका निभाई और 2021 की परीक्षा के लिए जगदीश से पेपर खरीदा। इसके बाद यह पेपर बर्खास्त प्रधानाध्यापक अनिल कुमार उर्फ शेरसिंह मीणा के जरिए आगे बेचा गया, जिसने भूपेंद्र सारण को पेपर उपलब्ध कराया। भूपेंद्र सारण पहले भी कई पेपर लीक मामलों में शामिल रहा है और उसने करीब 10 अभ्यर्थियों को पेपर पढ़ाया।
जांच में यह भी सामने आया है कि जेईएन भर्ती 2021 के टॉपर की ओएमआर शीट में भी नंबर बढ़ाए गए थे। एसओजी ने एफआईआर में तत्कालीन अध्यक्ष बी.एल. जाटावत की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा 3 फरवरी 2019 को प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा 2018 के उत्तर-पत्रों की जांच के दौरान भी फर्म के कर्मचारियों द्वारा ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की गई थी, जिसमें दर्जनों कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
गौरतलब है कि परीक्षा आयोजित करने वाली फर्म राभव लिमिटेड के शादान और विशाल सहित पांच कर्मचारियों को वर्ष 2019 में लखनऊ में यूपी एसटीएफ ने 62 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसी कार्रवाई के दौरान सिपाही अनिल चौधरी की भूमिका भी उजागर हुई थी। एसओजी के अनुसार, अनिल चौधरी ने जेईएन भर्ती 2021 में भी फर्जीवाड़ा कर कृष्ण चौधरी को टॉप कराया था और उसने जेईएन योगेश चौधरी के साथ मिलकर रीट 2021 और सेकेंड ग्रेड अध्यापक भर्ती 2022 के पेपर भी लीक किए थे। मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।