Thursday, 15 January 2026

एसआईआर के नाम पर कांग्रेस समर्थित वोट काटने का षड्यंत्र: डोटासरा का आरोप, लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया


एसआईआर के नाम पर कांग्रेस समर्थित वोट काटने का षड्यंत्र: डोटासरा का आरोप, लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया

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जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब विधानसभा चुनाव में अभी तीन वर्ष शेष हैं और कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है, तब भी एसआईआर चलाकर पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनावों में देरी की गई। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि एसआईआर के बावजूद तथाकथित “अशुद्ध और फर्जी” मतदाता सूची के आधार पर ही स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की तैयारी है।

डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने एसआईआर प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई, जहां जरूरत पड़ी वहां उपस्थित रहकर कार्य किया और चुनाव आयोग के साथ हर स्तर पर संवाद व सहयोग किया। इसके बावजूद आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि के दिन भाजपा के राजस्थान प्रभारी बीएल संतोष द्वारा गुप्त संगठनात्मक बैठकें की गईं। इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जयपुर दौरे के दौरान भाजपा नेताओं के साथ चार घंटे की बैठक कर एसआईआर को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए। आरोप है कि इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पेन ड्राइव के माध्यम से डेटा भाजपा नेताओं को दिया गया।

डोटासरा के अनुसार इस डेटा के आधार पर भाजपा ने केंद्रीयकृत एजेंसियों के जरिए पहले से मुद्रित फॉर्म तैयार कराए, जिन पर फर्जी हस्ताक्षर हैं और कई मामलों में बीएलए के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। नियमों के विपरीत, ड्राफ्ट प्रकाशन से मात्र एक दिन पहले हजारों की संख्या में ये फॉर्म कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए जमा कराए गए। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार एक बीएलए एक दिन में अधिकतम 50 नाम हटाने के लिए आवेदन दे सकता है और ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद यह सीमा मात्र 10 है, लेकिन इसके विपरीत 2000 से 4000 तक फॉर्म एक ही दिन में जमा कराए गए।

डोटासरा ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 14 जनवरी 2026 तक जारी डाटा के अनुसार भाजपा के 973 बीएलए ने नाम जोड़ने के लिए 211 और हटाने के लिए 5694 आवेदन दिए, जबकि कांग्रेस के 110 बीएलए ने 185 नाम जोड़ने और मात्र 2 नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों को निशाना बनाया जहां कांग्रेस कम मतों से जीती थी, या जहां दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या अधिक है। इसके लिए कंपनियों को ठेका देकर कांग्रेस समर्थित मतदाताओं—जैसे युवा मित्र आंदोलन, अरावली संरक्षण आंदोलन और कर्मचारी आंदोलनों से जुड़े लोगों—की पहचान कर उनके नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला कलेक्टर और चुनाव अधिकारी भाजपा के दबाव में आकर नियमविरुद्ध तरीके से मतदाताओं के नाम काटने में सहयोग करेंगे, तो कांग्रेस कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे और जोरदार विरोध करेंगे। डोटासरा ने कहा कि इलेक्ट्रोल मैनुअल के अनुसार बल्क आवेदन स्वीकार नहीं किए जा सकते और फार्म-7 के तहत शपथपत्र सहित साक्ष्य अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश आवेदनों में न तो सही जानकारी है और न ही हस्ताक्षर।

प्रेसवार्ता में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पहले 4000 आवेदन आए थे, लेकिन अचानक यह संख्या 12000 हो गई। उन्होंने मांग की कि निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन किसने और किस नियम के तहत जमा किए। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा 500 से 700 आवेदन एक साथ जमा करना स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है और इस पर तत्काल मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

इस अवसर पर मुख्य सचेतक रफीक खान ने आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में फर्जी हस्ताक्षरों से कांग्रेस पार्षद और उनके परिवार के नाम कटवाने के प्रयास का मामला भी उठाया। अंत में डोटासरा और टीकाराम जूली ने राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त नवीन महाजन से मुलाकात कर कांग्रेस की ओर से ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

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