



लक्ष्मणगढ़ सीकर। सीकर जिले के हरसावा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (NH-52) पर बुधवार को हुए भीषण सड़क हादसे में फतेहपुर निवासी छह महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कार और तेज रफ्तार ट्रक की आमने–सामने की जोरदार भिड़ंत इतनी भयावह थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर तहस-नहस हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस और एंबुलेंस की मदद से घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
हादसे में जान गंवाने वाली महिलाओं की पहचान संतोष पत्नी सत्यनारायण माली, तुलसी देवी पत्नी ललित, मोहन देवी पत्नी महेश, इन्द्रा पुत्री महेश, आशा पत्नी मुरारी और चंदा पत्नी सुरेन्द्र के रूप में हुई है। सभी महिलाएं फतेहपुर क्षेत्र की रहने वाली थीं और रघुनाथपुर से लक्ष्मणगढ़ किसी बैठक में शामिल होकर कार से वापस लौट रही थीं। इसी दौरान हरसावा के पास NH-52 पर तेज रफ्तार ट्रक से कार की जोरदार टक्कर हो गई।
दुर्घटना में वशीम पुत्र मनीर खां, सोनू पुत्री सुरेन्द्र और बरखा पत्नी ओमप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को स्थानीय लोगों और पुलिस की सहायता से एंबुलेंस द्वारा फतेहपुर के राजकीय उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें सीकर रेफर कर दिया। हादसे के बाद NH-52 पर करीब आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही फतेहपुर पुलिस मौके पर पहुंची, ट्रक और कार को सड़क से हटवाकर यातायात सुचारु कराया।
मृतकों के शवों को फतेहपुर के राजकीय उप जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है, जहां परिजनों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की जाएगी। एक ही इलाके की छह महिलाओं की मौत से फतेहपुर कस्बे और आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। शाम तक परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरसावा के पास हाईवे पर तेज रफ्तार भारी वाहनों की आवाजाही और स्पीड कंट्रोल/ट्रैफिक मॉनिटरिंग की कमी लगातार बड़े हादसों का कारण बन रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से दुर्घटना स्थल पर स्पीड कंट्रोल, चेतावनी साइनबोर्ड और बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्थाएं करने की मांग की है।
पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है और ट्रक चालक की भूमिका तथा वाहनों की स्थिति की पड़ताल की जा रही है। यह हृदयविदारक हादसा एक बार फिर NH-52 की सुरक्षा व्यवस्था और भारी वाहनों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।