



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में राजस्थान सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों में तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। राज्य सरकार ने बीते दो वर्षों में एआई, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, क्लाउड कम्प्यूटिंग, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए सशक्त इकोसिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से चार नई नीतियां लागू की हैं। इसी क्रम में 4 से 6 जनवरी तक राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026 का आयोजन किया जा रहा है, जिससे राजस्थान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर आईटी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन में सक्रिय योगदान देते हुए राजस्थान को आईटी–आईटीईएस और नवाचार का केंद्र बनाने पर काम कर रही है। राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025, राजस्थान एवीजीसी-एक्सआर नीति-2024, राजस्थान डेटा सेंटर पॉलिसी-2025 और राजस्थान एआई-एमएल पॉलिसी-2026 के माध्यम से न केवल निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर कुशल रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।
जयपुर स्थित भामाशाह डेटा सेंटर 800 रैक क्षमता वाला स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टियर-4 डेटा सेंटर है और यह सरकारी स्वामित्व वाला देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर माना जाता है। डेटा की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए अब राजस्थान में निजी क्षेत्र के डेटा सेंटर्स की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। राजस्थान डेटा सेंटर पॉलिसी-2025 का लक्ष्य प्रदेश में एक विश्वस्तरीय डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित कर राजस्थान को इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाना है।
इस नीति के तहत 10 वर्षों तक 10–20 करोड़ रुपये वार्षिक एसेट क्रिएशन इंसेंटिव, 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले पहले तीन डेटा सेंटर्स को 25 प्रतिशत अतिरिक्त सनराइज इंसेंटिव, 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान, ट्रांसमिशन और व्हीलिंग शुल्क में 100 प्रतिशत छूट, स्टांप ड्यूटी, भू-रूपांतरण और विद्युत शुल्क में रियायत सहित 10 करोड़ रुपये तक बाह्य विकास शुल्क से छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, बेहतर कनेक्टिविटी, गुणवत्तापूर्ण कॉमर्शियल स्पेस, कुशल आईटी प्रोफेशनल्स और कम स्थापना लागत के चलते जयपुर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए आदर्श गंतव्य बनकर उभर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025 लागू की है। इस नीति का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में 200 से अधिक जीसीसी स्थापित कर 1.50 लाख से अधिक रोजगार सृजित करना है। जयपुर के साथ उदयपुर और जोधपुर को भी जीसीसी हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
राजस्थान एवीजीसी-एक्सआर नीति-2024 के तहत एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी के क्षेत्र में स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। राज्य में बनने वाली एनीमेशन फिल्मों, गेम्स और कॉमिक्स को उत्पादन अनुदान दिया जाएगा। साथ ही अटल इनोवेशन स्टूडियो और एक्सेलेरेटर स्थापित किए जाएंगे, जो कोडिंग, वीएफएक्स लैब और एडवांस्ड कम्प्यूटिंग सुविधाओं से लैस होंगे।
राजस्थान एआई-एमएल पॉलिसी-2026 का उद्देश्य एआई और मशीन लर्निंग का उत्तरदायी, नैतिक और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है। इस नीति के जरिए ई-गवर्नेंस को विस्तार देते हुए सार्वजनिक सेवाओं को तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जाएगा। एआई प्रणालियों में पक्षपात कम करने, डेटा सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया की स्पष्टता पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत प्रदेश में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि आईस्टार्ट राजस्थान के माध्यम से अब तक 7,200 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है और 42,500 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतिगत पहलों और डिजिफेस्ट जैसे आयोजनों से राजस्थान तकनीकी प्रगति और डिजिटल अर्थव्यवस्था का नया अध्याय लिखने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।