



राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने एक बार फिर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट पर भरोसा जताया है। केंद्रीय नेतृत्व ने पायलट को दोबारा राष्ट्रीय स्तर की बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए आगामी केरल विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए बुधवार को पांच चुनावी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है, जिसे संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, वहां मार्च–अप्रैल के दौरान विधानसभा चुनाव संभावित हैं। पायलट के साथ ही कांग्रेस ने असम जैसे अहम राज्य के लिए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया है। इसके अलावा बंधु तिर्की को भी असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजस्थान से इकलौते नेता को मिली जिम्मेदारी
केरल के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाए जाने के साथ ही सचिन पायलट राजस्थान से ऐसे इकलौते नेता हैं, जिन्हें इस चरण में यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। इससे पहले बिहार विधानसभा चुनावों में अशोक गहलोत को वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया था। अब दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य केरल में पायलट को जिम्मेदारी देकर कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के युवा नेतृत्व पर भरोसा जताने का संकेत दिया है।
पहले भी मिल चुकी है राष्ट्रीय जिम्मेदारी
यह पहला अवसर नहीं है जब कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट पर भरोसा किया हो। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला राजस्थान की सियासत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना गया था। अशोक गहलोत के प्रभाव के बीच एक युवा नेता को आगे बढ़ाकर केंद्रीय नेतृत्व ने संगठनात्मक संतुलन साधने का प्रयास किया था।
वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में सचिन पायलट की भूमिका टिकट वितरण, चुनावी रणनीति, प्रचार अभियान, संगठनात्मक समन्वय और जमीनी फीडबैक को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की होगी। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, केरल में उनकी सक्रिय भूमिका से पार्टी को चुनावी तैयारियों में मजबूती मिलने की उम्मीद है।