



राजस्थान में जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JDVVNL) के भीनमाल सहायक अभियंता कार्यालय से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। किसानों द्वारा कृषि बिजली कनेक्शन के लिए जमा कराई गई डिमांड राशि विभागीय रिकॉर्ड से गायब बताई जा रही है, जबकि उन्हीं कनेक्शनों पर ट्रांसफार्मर लगाकर नियमित बिजली बिल जारी किए जा रहे हैं। इस मामले ने विद्युत निगम की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से बिना डिमांड राशि विभागीय खाते में जमा हुए ही ट्रांसफार्मर लगाकर कनेक्शन चालू कर दिए गए। किसानों को न तो स्पष्ट रसीदें दी गईं और न ही विभागीय खातों में राशि जमा होने का कोई रिकॉर्ड दिखाया जा रहा है।
रिकॉर्ड में नहीं मिला किसान का नाम
किसान लक्ष्मण राम चौधरी द्वारा करीब 1 लाख 80 हजार रुपये की डिमांड राशि जमा कराने का दावा किया गया है, लेकिन जब भीनमाल सहायक अभियंता कार्यालय में रिकॉर्ड की जांच की गई तो इस नाम से कोई प्रविष्टि नहीं मिली। सवाल पूछे जाने पर अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में दर्जनों ऐसे कनेक्शन हैं जो नियमों को दरकिनार कर जारी किए गए। कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूर-दराज की जमीनों के लिए कनेक्शन स्वीकृत किए गए।
एक के-नंबर से दो तरह की बिलिंग
मामले में एक ही के-नंबर से दो अलग-अलग प्रकार के बिजली बिल जारी होने के प्रमाण भी सामने आए हैं, जो विभागीय लेखा प्रणाली में गंभीर खामी और संभावित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों से वसूली गई डिमांड राशि आखिर गई कहां और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। इस बड़े फर्जीवाड़े से सरकार को भारी राजस्व नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। मामले को लेकर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।