



विधायक कोष से सिफारिश के नाम पर कमीशन मांगने के आरोपों में घिरे भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा के मामले में अब पार्टी की अनुशासन समिति स्टिंग ऑपरेशन की भी गहन जांच करेगी।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण को पार्टी की अनुशासन समिति को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब समिति यह समीक्षा करेगी कि वस्तुस्थिति क्या थी और अब तक जो भी कार्रवाई हुई है, वह समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि खबर में कितनी सच्चाई थी, क्या तथ्य सामने रखे गए और क्या किसी पक्ष को छिपाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी समाचार पत्र पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन पार्टी न्याय की प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करेगी।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने बीटीपी विधायक जयकृष्ण पाटीदार और भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा के मामलों में अंतर बताते हुए कहा कि बीटीपी विधायक ने ब्लैकमेलिंग की नीयत से सवाल लगाए और पैसे मांगते हुए रंगे हाथों पकड़े गए, जबकि डांगा के मामले में यह एक स्टिंग ऑपरेशन था, जिसमें न तो किसी वास्तविक कार्य की सिफारिश थी और न ही किसी राशि की स्वीकृति हुई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्टिंग में दिखाई गई स्वीकारोक्ति भी अपराध की श्रेणी में आती है और इसे शुचिता से जुड़ा गंभीर मामला माना जाता है, इसलिए पार्टी किसी को बचाने का प्रयास नहीं कर रही है।
गौरतलब है कि करीब 18 दिन पहले स्टिंग ऑपरेशन में राजस्थान के तीन विधायक विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले 40 प्रतिशत कमीशन मांगते हुए कैमरे पर कैद हुए थे। इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई थी और भाजपा ने डांगा प्रकरण को अनुशासन समिति को सौंप दिया था।