Friday, 02 January 2026

विधायक निधि कोष कमीशन मामला : सदाचार कमेटी ने तीनों विधायकों से की पूछताछ, सबूत पेश करने के लिए मांगा समय


विधायक निधि कोष कमीशन मामला : सदाचार कमेटी ने तीनों विधायकों से की पूछताछ, सबूत पेश करने के लिए मांगा समय

विधायक निधि कोष में कमीशन मांगने के मामले की जांच के तहत राजस्थान विधानसभा की सदाचार कमेटी ने शुक्रवार को तीनों आरोपित विधायकों से वन-टू-वन पूछताछ की। यह पूछताछ प्रातः काल 11:00 बजे विधानसभा परिसर में हुई, जिसमें सबसे पहले निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत, उसके बाद कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और अंत में भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा को बुलाया गया।

पूछताछ के दौरान कमेटी ने तीनों विधायकों से सीधा सवाल किया—
“क्या आपने कमीशन मांगा?”
जवाब में तीनों विधायकों ने स्वयं को पूरी तरह निर्दोष बताया और आरोपों से इनकार किया।

सबूत पेश करने के लिए समय मांगा

जब कमेटी ने उनसे अपने दावों के समर्थन में सबूत मांगे, तो तीनों ने समय की मांग की। भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा ने 15 दिन का, कांग्रेस विधायक अनीता जाटव ने 7 दिन का और निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत ने 10 दिन का समय मांगा।

सदाचार कमेटी ने तीनों की मांग स्वीकार कर ली है। अब तीनों विधायकों को समय सीमा पूरी होने के बाद अलग-अलग तारीखों में दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।आगे की कार्रवाई तीनों विधायकों द्वारा सबूत प्रस्तुत करने और दोबारा पूछताछ के बाद तय होगी।


सदाचार कमेटी की कड़ी चेतावनी—“भ्रष्टाचार हुआ तो बर्दाश्त नहीं करेंगे: कैलाश वर्मा

शुक्रवार को विधानसभा की सदाचारकमेटी के सभापति कैलाश वर्मा ने कहा कि यदि किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार साबित होता है, तो कमेटी इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सभापति कैलाश वर्मा ने कहा कि कमेटी सत्यता स्थापित करने के लिए स्टिंग करने वाले पत्रकार को भी बुलाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनके पास कौन से साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सदाचार कमेटी पूरी गंभीरता और निष्पक्षता से जांच कर रही है।

वर्मा ने सख्त लहजे में कहा— “यदि किसी प्रकार का भ्रष्टाचार सामने आता है, तो कमेटी उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा।” कमेटी की जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा।

विधायक ऋतु बनावत बोलीं—“हर कहानी के दो पहलू होते हैं, एक पक्ष देखकर निर्णय नहीं किया जा सकता”
विधायक निधि में कमीशनखोरी के आरोपों की जांच कर रही विधानसभा की सदाचार कमेटी के सामने शुक्रवार को निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत पेश हुईं। कमेटी की ओर से जारी नोटिस पर उपस्थित होकर बनावत ने अपना पक्ष विस्तार से रखा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि “हर कहानी के दो पहलू होते हैं, एक ही पक्ष देखकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।” ऋतु बनावत ने बताया कि जिस दिन से यह खबर प्रकाशित हुई है, वह लगातार अपना पक्ष स्पष्ट कर रही हैं।

विधायक ने कहा कि कमेटी ने उनसे पूछा कि खबरों में जो वीडियो और आरोप सामने आए हैं, उनमें उनकी भूमिका क्या है। इसके जवाब में उन्होंने पूरा घटनाक्रम बताया और यह भी कहा कि उनके खिलाफ प्रसारित वीडियो ‘एडिटेड’ है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक संदर्भ को हटाकर भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। बनावत ने कहा कि विधायक निधि खर्च करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन होती हैं और यह प्रत्येक मद में खर्च नहीं की जा सकती। ऐसे में कमीशन लेने का आरोप निराधार है। सदाचार कमेटी ने उनसे और दस्तावेज मांगे हैं, जिसके लिए उन्होंने समय मांगा है। अब अगली सुनवाई में वे आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत करेंगी।

कैमरे में कैद हुई डील

मामला तब सामने आया जब एक अखबार के स्टिंग ऑपरेशन में तीनों विधायक अपने विधायक फंड से विकास कार्यों की सिफारिश के बदले कमीशन की डील करते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हो गए थे। रिपोर्टर ने डमी फर्म का प्रोपराइटर बनकर संपर्क किया और इस कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया।

सदाचार कमेटी में 12 सदस्य

सदाचार कमेटी ने दो दिन पहले सदाचार कमेटी में सभापति वर्मा की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में तीनों विधायकों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तलब करने का निर्णय हुआ था, जिसके बाद नोटिस जारी किए गए थे। रविवार को विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने केस को औपचारिक रूप से सदाचार कमेटी को सौंपा था।

विधानसभा की सदाचार कमेटी में सभापति सहित 12 विधायक हैं। 5 कांग्रेस और 6 भाजपा के विधायक हैं। सभापति सहित भाजपा के 7 विधायक हैं। सभापति भाजपा विधायक कैलाश वर्मा हैं।

कमेटी में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया, गणेश घोघरा, भगवानाराम सैनी, मोती राम, वीरेंद्र सिंह, भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी, सुखवंत सिंह, जेठानंद व्यास, बालमुकुंद आचार्य, हंसराज पटेल और राजेंद्र गुर्जर सदस्य हैं।


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