


हनुमानगढ़ जिले में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने से अधिक चर्चा टिब्बी क्षेत्र की इथेनॉल फैक्ट्री विवाद पर रही। जिले के प्रभारी खाद्य आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने स्पष्ट किया कि ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने लिखित आश्वासन दिया है कि जब तक वार्ता में तय बिंदुओं पर समाधान नहीं निकल जाता, तब तक प्लांट का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।
खाद्य आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा गोदारा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल हनुमानगढ़ भेजकर संवाद की पहल की है। उन्होंने कहा कि जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार लगातार फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति के साथ वार्ता कर रही है।
उन्होंने वर्ष 2022 में फैक्ट्री स्वीकृति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “यह परियोजना किसके शासन में और किसके प्रयासों से लाई गई, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।” गोदारा ने कहा कि किसी भी नई औद्योगिक परियोजना का प्रारंभिक विरोध स्वाभाविक और मानवीय प्रवृत्ति है। परन्तु विरोध सही है या गलत—इस पर अंतिम टिप्पणी करना उनका काम नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि संघर्ष समिति को परियोजना से नुकसान की आशंका है, तो सरकार पुनः बैठक कर समाधान निकालने के लिए तैयार है। संवाद से ही रास्ता निकलेगा और सहमति के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
अपने अनुभव साझा करते हुए खाद्य आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि बीकानेर में नहर आने पर भी शुरुआती विरोध हुआ था, सड़कों, मोबाइल टावरों और अन्य विकास कार्यों के समय भी कई आशंकाएँ उठीं, लेकिन समय के साथ लोगों ने इन सबकी उपयोगिता समझी। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह नहीं है कि लोग जागरूक नहीं हैं—बल्कि नई व्यवस्था को स्वीकार करने में समय लगता है।
प्रेस वार्ता में खाद्य आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने राज्य सरकार के दो वर्षों के सुशासन, विकास और विश्वास से भरे कार्यकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में 3400 करोड़ रुपये की लागत से नहर व जल संरक्षण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। पेपर लीक रोकथाम, युवाओं को रोजगार, किसानों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार द्वारा की जा रही पहल का भी उल्लेख किया।