



कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व उप मुख्यमंत्री और टोंक विधायक सचिन पायलट ने कहा कि “लोकतंत्र में किसी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से कट जाना सबसे बड़ा पाप है।” उन्होंने अधिकारियों और बीएलए से अपील की कि वे मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण कार्य में पूरी सावधानी और निष्पक्षता बरतें, ताकि कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
पायलट टोंक विधानसभा क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर थे, जहां उन्होंने अलियारी, क्यारिया, अमीनपुरा, भरनी और गुलाबपुरा समेत कई ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों, पार्टी कार्यकर्ताओं और बीएलए से संवाद किया।
पायलट ने कहा कि हालिया घटनाओं और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस से स्पष्ट हुआ है कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के निर्णयों में पक्षपात दिखाई दे रहा है, इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अत्यधिक सतर्क रहकर हर वैध मतदाता का नाम सूची में सुनिश्चित करना होगा।
मीडिया से बातचीत में पायलट ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा SIR की समय सीमा 7 दिन बढ़ाना सही कदम है, पर यह निर्णय काफी देर से आया। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि—
“नोटबंदी हो, GST हो, जातिगत जनगणना हो या SIR—सरकार पहले जल्दबाजी में फैसले लेती है, और जब कांग्रेस सुझाव देती है तो हठधर्मिता में उसे ठुकरा देती है। पर जब जनता का दबाव बढ़ता है, तब वही सुझाव मानकर फैसला बदलती है।”
पायलट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्षी दलों को विश्वास में लेकर निर्णय लेने की परंपरा होनी चाहिए, ताकि जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।
पायलट ने कहा कि आयोग द्वारा बढ़ाई गई समय सीमा का उपयोग करते हुए अधिकारी पारदर्शी तरीके से पुनरीक्षण कार्य पूरा करें और यह सुनिश्चित करें कि—
“कोई भी मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।”