


यूनीसेफ और प्रिवेंशन ऑफ सर्वाइकल कैंसर एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (PCC-RAJ) के संयुक्त तत्वावधान में रणथम्भौर फॉरेस्ट गेस्ट हाउस, सवाई माधोपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विषय था — “उभरती किशोर स्वास्थ्य चुनौतियां: एचपीवी टीकाकरण का महत्व”।
कार्यशाला में देशभर से आए 30 से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और पत्रकारों ने भाग लिया।
हर 8 मिनट में एक महिला कैंसर से काल का ग्रास
विशेषज्ञों ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
हर दिन करीब 200 महिलाएं इस बीमारी से अपनी जान गंवाती हैं।
यानी हर 8 मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर से मौत का शिकार होती है।
वर्ष 2022 में 79,000 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 34,800 महिलाओं की मृत्यु हुई।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर एचपीवी (Human Papilloma Virus) का टीकाकरण करवा लिया जाए, तो 90% तक मृत्यु दर घटाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने कहा – मुफ्त टीकाकरण ही स्थायी समाधान
कार्यशाला में यह सहमति बनी कि मुफ्त टीकाकरण अभियान ही देशभर में महिलाओं को इस कैंसर से मुक्ति दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि तमिलनाडु, सिक्किम और बिहार की तर्ज पर पूरे देश में 14–15 वर्ष की किशोरियों के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू करे।
विशेषज्ञों की राय और सुझाव
डा. मनीषा चावला (यूनीसेफ राजस्थान) ने कहा कि एचपीवी टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए स्कूल आधारित और सामुदायिक अभियानों को जोड़ना होगा।
कुमार मनीष (एआई एक्सपर्ट) ने ‘स्वास्थ्य पत्रकारिता और गलत सूचना नियंत्रण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका’ विषय पर जानकारी दी।
सुरेंद्र कुमार धालेटा और सुभाष कृष्णा ने पत्रकारों को तथ्यात्मक और जागरूक रिपोर्टिंग पर जोर देने की सलाह दी।
अंकुश सिंह (यूनीसेफ कैप स्पेशलिस्ट) ने कहा कि वैक्सीन से शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी संक्रमण को लंबे समय तक रोकने में सक्षम होती हैं।
यह वैक्सीन Human Papilloma Virus (HPV) से बचाव करती है, जो गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर और जननांग वॉर्ट्स का प्रमुख कारण है।
वैक्सीन से शरीर में बनने वाली प्रतिरक्षा प्राकृतिक संक्रमण की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होती है।
इससे संक्रमण की संभावना और उसकी गंभीरता दोनों कम होती हैं।
किस आयु में लगवाना सबसे लाभदायक9 से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए सबसे प्रभावी।
15 से 26 वर्ष की महिलाएं भी यह टीका लगवा सकती हैं, हालांकि प्रभाव थोड़ा कम होता है।
साइड इफेक्ट्स सामान्य और हल्के होते हैं — हल्का दर्द, सूजन या लालिमा।
कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से कहा कि एचपीवी टीकाकरण भारत में महिलाओं के जीवन की सुरक्षा का कवच बन सकता है।
जागरूकता, नीति-निर्माण और मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रमों के संयोजन से देश सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकता है।