


सवाईमाधोपुर। भारत में महिलाओं में तेजी से बढ़ते गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) के खतरे को रोकने के लिए अब 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को एचपीवी (HPV) वैक्सीन लगाना अनिवार्य किया जाएगा। इस निर्णय की जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई तैयारियों के बीच सोमवार को यूनिसेफ और फ़्यूचर सोसाइटी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में दी गई।
कार्यशाला का आयोजन सवाईमाधोपुर के झूमर बावड़ी रणथंभौर फॉरेस्ट गेस्ट हाउस सभागार में किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हर आठ मिनट में एक महिला गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से पीड़ित हो रही है, और हर साल करीब 80,000 महिलाओं की मौत इस बीमारी से होती है। यह बीमारी पूरी तरह रोकथाम योग्य और उपचार योग्य है, बशर्ते समय पर जांच और टीकाकरण हो।
अब स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर लगेगा एचपीवी टीका
विशेषज्ञों के अनुसार अब देशभर में 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और आशा वर्कर्स के माध्यम से एचपीवी वैक्सीन लगाई जाएगी। जो किशोरियां स्कूल में उपस्थित नहीं होंगी, उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों या मोबाइल टीमों के माध्यम से टीका लगाया जाएगा।
यूनिसेफ राजस्थान चैप्टर की हेल्थ ऑफिसर डॉ. मनीषा चावला ने बताया कि माता-पिता और शिक्षकों को भ्रांतियों से दूर कर टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह टीका किशोरियों को न केवल कैंसर से बचाएगा बल्कि उनके जीवन को दीर्घ और स्वस्थ बनाएगा।
तीन राज्यों में पहले से चल रहा मुफ्त टीकाकरण अभियान
फिलहाल बिहार, तमिलनाडु और सिक्किम में मुफ्त एचपीवी टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है। जल्द ही यह देशव्यापी स्तर पर लागू होगा। वैक्सीन को भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) से मंजूरी मिल चुकी है और इसे राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया है।
पहली बार यह वैक्सीन सरकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अब तक इसे केवल निजी अस्पतालों में शुल्क देकर लगवाया जा सकता था।
गंभीर स्थिति और सुधार की दिशा में बड़ा कदम
एसबीसीसी स्पेशलिस्ट मंजरी ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर दुनिया में महिलाओं में चौथा और भारत में दूसरा सबसे आम कैंसर है। वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर से होने वाली हर चार मौतों में से एक भारत में होती है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार — माता-पिता, दादा-दादी और अभिभावक — मिलकर इस अभियान में शामिल हों, तो इस बीमारी का उन्मूलन संभव है।
यूनिसेफ की पहल: जागरूकता से जुड़ेंगे पत्रकार, समाजसेवी और नीति निर्माता
यूनिसेफ राजस्थान चैप्टर के चीफ रुशभ हेमानी ने कहा कि यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह पहल स्वस्थ भारत – स्वस्थ नारी के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि यदि यह टीका किशोरियों को वायरस के संपर्क में आने से पहले दिया जाए, तो गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की उस वैश्विक रणनीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करना है।
इस अवसर पर फ्यूजन सोसाइटी की डॉ. मीना शर्मा ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए सुधारात्मक उपायों को शीघ्र गति से लागू किया जाना चाहिए।