



अंता (बारां) — अंता विधानसभा उपचुनाव के प्रचार बंद होने से पहले क्षेत्र में सियासी गतिविधियों में तेज़ी आ गई है। रविवार को मांगरोल में हुई रैली और रोड-शो ने माहौल गरम कर दिया जहाँ निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का वादा किया। अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जनता उन्हें विधायक बनाती है तो तहसीलदार, एसडीएम, थानेदार या कोई भी अफसर रिश्वत के नाम पर एक रुपया भी लेगा तो उसे कड़े शब्दों में दंडित किया जाएगा — “उस अफसर का काला मुंह करके गधे पर बैठाकर बिंदौरी निकाल दूंगा।” उन्होंने दावा किया कि उनके विधायक बनने के बाद अंता विधानसभा में भ्रष्टाचार का नामोनिशान नहीं रहेगा और ईमानदार अफसरों का सम्मान होगा।
सभा में आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह समेत तीसरे मोर्चे के कई नेताओं ने मंच साझा किया। बेनीवाल और गुढ़ा ने कांग्रेस-भाजपा पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों दल कई क्षेत्रों में एक साथ काम कर रहे हैं और राजनीतिक पटल पर रणनीतियाँ बनती रहती हैं। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि खींवसर उपचुनाव के दौरान केंद्र के कुछ नेतृत्व ने कहा था कि हनुमान को जीतना नहीं चाहिए, और उन्होंने दिग्गज नेताओं की दिल्ली बैठकों का हवाला दिया। उन्होंने डोटासरा को भी निशाना बनाया और कहा कि यदि वे कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय लड़ें तो उनके आधार पर 3,000 वोट भी नहीं मिलेंगे — “सिंबल के वोट आते हैं, खुद के दम पर लड़ो तो पता लगेगा।”
सभा में किरोड़ी लाल मीणा का नाम भी चर्चा में रहा; बेनीवाल ने कहा कि डॉ. किरोड़ी से उम्मीदें थीं कि वे नरेश के खिलाफ नहीं आएँगे, और टिप्पणी की कि किरोड़ी के लिए नरेश ने कई बार लाठियाँ भी खाईं। नागौर सांसद ने किरोड़ी के रवैये पर टिका-टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने कभी दूसरों की तारीफ सहन नहीं की और अपने लिए माहौल बनाने के लिए बड़े-बड़े रैलियों का इस्तेमाल किया। राजनैतिक समीकरणों और जातीय मेलजोल (जैसे जाट-राजपूत एकता) का जिक्र कर वक्ताओं ने कहा कि जब-जब जाट-राजपूत एक साथ आए हैं सत्ता में परिवर्तन हुआ है, और इस बार भी ऐसे गठजोड़ से दोनों मुख्य दलों की दुकानें बंद हो सकती हैं।
सरकारी और स्थानीय नेताओं के बीच तीखी शब्दबाज़ी, जातीय गठजोड़ के राजनीतिक संकेत और निर्दलीय प्रत्याशियों की बढ़ती लोकप्रियता ने अंता उपचुनाव के अंतिम दिनों का चुनावी परिदृश्य बनाते हुए मतदाताओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण और निर्णायक वातावरण बना दिया है।