



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के मुद्दे पर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पांच साल का समय बर्बाद कर दिया, जिससे परियोजना की लागत 40,000 करोड़ से बढ़कर 70,000 करोड़ हो गई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने 2013 में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अब सरकार कह रही है कि 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत में काम पूरा होगा। अगर ऐसा होता है, तो हमें खुशी होगी, लेकिन असली मुद्दा पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का है, जिसे लेकर कोई तैयारी नहीं हो रही।"
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को राजस्थान के विकास और रोजगार सृजन का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि कॉम्प्लेक्स के जरिए प्लास्टिक आधारित उत्पादों की हजारों संभावनाएं हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि रीको को जमीनों का विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को निवेशकों और युवाओं को ट्रेनिंग देनी चाहिए।छोटे और मझोले उद्योगों को लोन और टेक्नोलॉजी की जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।बड़ौदा और अन्य पेट्रोकेमिकल हब का अध्ययन करने के लिए टीमें भेजनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राजस्थान के युवा इस परियोजना से अधिकतम लाभ उठा सकें। यह सिर्फ रिफाइनरी की बात नहीं है, बल्कि पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को एक औद्योगिक केंद्र बनाना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।"
गहलोत ने भाजपा सरकार पर क्रेडिट लेने और रिफाइनरी के मुद्दे को टालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग कैसे किया जाए और इसे राजस्थान के लोगों के लाभ के लिए कैसे लागू किया जाए।
गहलोत ने कहा कि यह परियोजना न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण है। "हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परियोजना से अधिकतम रोजगार सृजन हो। इसके लिए निवेशकों और युवाओं को प्रशिक्षित करना जरूरी है।"