Saturday, 29 August 2026

लोकसभा का परिणाम को लेकर एग्जैक्ट पोल के नतीजे मुख्यमंत्री शर्मा को नहीं आ रहे हैं रास, 25 सीट जीतने का दावा, 5 लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस और गठबंधन के पक्ष में जाने की संभावना !


लोकसभा का परिणाम को लेकर एग्जैक्ट पोल के नतीजे मुख्यमंत्री शर्मा को नहीं आ रहे हैं रास, 25 सीट जीतने का दावा, 5 लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस और गठबंधन के पक्ष में जाने की संभावना !

राजस्थान लोकसभा की 25 सीटों को लेकर एग्जिट पोल भाजपा के नेताओं को रास नहीं आ रहा है। यह बात सही है कि इस बार के लोकसभा के चुनाव में भाजपा वर्ष 2014 और 2019 के इतिहास को नहीं दौरा पाएगी। निश्चित तौर पर इस बार कांग्रेस और इंडिया एलाइंस के पक्ष में पांच लोकसभा क्षेत्र जा सकती है! यही कारण है कि एग्जिट पोल के दावों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी सहित विभिन्न नेता नाकार रहे हैं और उनका कहना कि 25 सीट जीतेंगे। यह बात भी सही है कि 4 जून मतगणना से पहले भाजपा किसी भी सीट को हारना नहीं चाहती । 

मुख्यमंत्री और भाजपा के नेताओं का भविष्य भी इसी बात पर टिका हुआ है कि लोकसभा की 25 सीट जीती जाए। मतगणना के बाद जब वास्तविक स्थिति सामने आएगी तो यही कहा जाएगा की जनता का फैसला हम स्वीकार करते हैं। सत्ताधारी पार्टी भाजपा के नेताओं के सामने यह सवाल हमेशा चर्चा का विषय बना रहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे चुनाव में अधिक सक्रिय क्यों नहीं रही। वे अपने बेटे दुष्यंत सिंह के लोकसभा क्षेत्र झालावाड़-बारा तक ही सीमित रही। यही नहीं भाजपा के स्टार प्रचारक केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर,कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बीकानेर,केंद्रीय कृषि कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी बाड़मेर-जैसलमेर और श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव अलवर तक तक ही सीमित रहे। चुनाव के बाद ही वह अपने क्षेत्र से बाहर निकल सके। 

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ.सतीश पूनिया को राजस्थान की राजनीति से बाहर करने के लिए हरियाणा का प्रभारी बनाया गया और राजेंद्र राठौड़ को कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई। भाजपा कार्यालय में राज्यसभा के पूर्व सदस्य नारायण पंचारिया और धरोहर बोर्ड के अध्यक्ष औकार सिंह सिंह को लोकसभा चुनाव प्रबंधन की कमान दी गई। इस बार के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी सहितकुछ स्थानीय नेता ही लोकसभा के चुनाव में सक्रिय नजर आए। 

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले संगठन महामंत्री चंद्रशेखर मिश्र को तेलंगाना और चुनाव प्रभारी अरुण सिंह को आंध्र प्रदेश भेजना चर्चा का विषय बना रहा। परिणाम आप चाहे कुछ भी आए लेकिन राजस्थान के कुछ वरिष्ठ नेता अब यह दावा नहीं करेंगे कि उनकी वजह से चुनाव में हार या या जीत हुई है। यह बात सही है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी जीत का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को देना चाहते हैं। यही कारण है कि अब दोनों किसी भी सीट को हारना नहीं चाहते 25 सीट भाजपा के पक्ष में करना चाहते हैं ।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने नेताओं के समक्ष दावा करते हुए कहा है कि 12 लोकसभा क्षेत्र पर कांग्रेस और इंडिया एलाइंस का कब्जा होगा। उन्होंने अपने नेताओं को फीडबैक देते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति में कांग्रेस, झुंझुनू, चूरू, बाड़मेर-जैसलमेर, भरतपुर, करौली-धौलपुर, टोंक-सवाईमाधोपुर, गंगानगर, जयपुर ग्रामीण के अलावा इंडिया गठबंधन के रूप में नागौर और सीकर चुनाव जीत रहे हैं। डोटासरा ने मीडिया चेयरपर्सन जय राम रमेश को चेताते हुए कहा कि वे  चुनाव आयोग को बताएं कि भाजपा कुछ गड़बड़ कर सकती है। उन्होंने कहा कि हमने अपने काउंटिंग एजेंट को मतगणना सही तरीके से करवाने के लिए कुछ दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा के चुनाव में भाजपा कांग्रेस से 11 लोकसभा क्षेत्र से पीछे थी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा साथ लोकसभा क्षेत्र स्पष्ट रूप से जीते बाकी पर कांग्रेस और गठबंधन चुनौती दे रहा है।

कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो गठबंधन किया निश्चित तौर पर उसमें देरी हुई। इसी के चलते डूंगरपुर- बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी को समर्थन देने के बावजूद भी कांग्रेस को कोई ज्यादा लाभ नहीं हुआ। वहां भाजपा के प्रत्याशी महेंद्रजीत मालवीया ने अपना राजनीतिक कमाल दिखाते हुए कांग्रेस के उम्मीदवार को नामांकन वापस नहीं लेने दिया। यही कारण रहा कि कांग्रेस उम्मीदवार के सामने उदयपुर सहित विभिन्न लोकसभा क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार चुनौती देते रहे। कांग्रेस ने डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र और बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों को 11 दिन बाद निष्कासित करने की कार्रवाई करनी पड़ी। इस बार के चुनाव मेंअखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट राजस्थान में ही नहीं देश में 100 से अधिक चुनावी सभाएं करके प्रभावशाली नेता के रूप में निखर के सामने आए। प्रभारीसुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने भी प्रचार प्रसार किया। जितेंद्र सिंह अलवर तक की सीमित रहे।

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के सैकड़ो नेता भाजपा में शामिल हुए। भाजपा में जाने वाले नेताओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तीखी बयानबाजी भी चर्चा में रही। लोकसभा का चुनाव निश्चित तौर पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को खट्टे-मीठे अनुभव दे गया और अब परिणाम जब आएंगे तो निश्चित तौर पर वास्तविकता सामने आएगी जिसे स्वीकार करना ही पड़ेगा। वही सत्तादारी भाजपा के नेता इस बात को नहीं मान रहे और कह रहे हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में तीसरी बार भी भाजपा प्रदेश की सभी 25 सीट जीतेगी।अब दावे तो अपने-अपने हैं लेकिन 4 जून को निश्चित तौर पर मतदाताओं का निर्णय सभी के सामने आ जाएगा। लेकिन यह बात सही है चुनाव निश्चित तौर पर कांग्रेस की जगह आम जनता ने लड़ा है। भाजपा- कांग्रेस दोनों दलों ने टिकट के वितरण में कुछ कमियां जरूर रखी जिसके कारण चुनाव जीतना चुनौती बना।

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