Friday, 28 August 2026

राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा का नया टिकट फॉर्मूला, सूची की जगह सीधे मिलेगा सिंबल


राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा का नया टिकट फॉर्मूला, सूची की जगह सीधे मिलेगा सिंबल

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जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा इस बार टिकट वितरण में नया फार्मूला अपना सकती है। पार्टी प्रत्याशियों की सार्वजनिक सूची जारी करने के बजाय चयनित उम्मीदवारों को सीधे जिला कार्यालय बुलाकर चुनाव चिन्ह (सिंबल) देने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि इससे टिकट घोषणा के बाद होने वाली बगावत को नियंत्रित करने और प्रत्याशियों के नाम अंतिम समय तक गोपनीय रखने में मदद मिलेगी।

जिन संभागों में प्रत्याशी चयन को लेकर रायशुमारी पूरी हो चुकी है, वहां संबंधित निकाय प्रभारियों को प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर वाले आवश्यक सिंबल प्राधिकरण दस्तावेज देकर क्षेत्र में रवाना किया गया है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में जिन उम्मीदवारों के नाम अंतिम रूप से तय होंगे, उनकी जानकारी संबंधित जिलाध्यक्ष और विधायक तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद जिला स्तर पर अधिकृत प्रत्याशी को बुलाकर पार्टी की ओर से चुनाव चिन्ह से संबंधित प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

लिस्ट की बजाय जिला स्तर पर प्रत्याशी को मिलेगी सूचना

भाजपा में अभी तक अलग-अलग संभागों और निकायों के एक-एक वार्ड को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी इस बार संभावित बगावत को देखते हुए उम्मीदवारों के नामों को सार्वजनिक करने में अतिरिक्त सावधानी बरत रही है।

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश स्तर पर उम्मीदवार का नाम फाइनल होने के बाद इसकी जानकारी संबंधित जिलाध्यक्ष और विधायक को ई-मेल के माध्यम से भेजी जा सकती है। इसके बाद स्थानीय संगठन चयनित उम्मीदवार से संपर्क करेगा और उसे पार्टी का अधिकृत सिंबल दिया जाएगा।

इस रणनीति से पार्टी उन दावेदारों को टिकट घोषणा से पहले तक साधे रखने की कोशिश कर सकती है, जो लंबे समय से अपने-अपने वार्डों से दावेदारी कर रहे हैं।

भीलवाड़ा में टिकटों को लेकर बढ़ी भाजपा की मुश्किल

भीलवाड़ा में टिकट वितरण को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष सामने आया है। भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सभापति मंजू चेचानी ने चुनाव में महिला कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।

उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिलने की स्थिति में शनिवार दोपहर तक आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इस बयान के बाद स्थानीय भाजपा संगठन में हलचल तेज हो गई है।

मामला अब केवल टिकट वितरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पार्टी संगठन के भीतर महिला कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

भाजपा में शामिल होने के दो दिन बाद कमलेश साहू का यू-टर्न

अजमेर जिले की केकड़ी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष कमलेश साहू ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। भाजपा में शामिल होने के महज दो दिन बाद उन्होंने शुक्रवार को वीडियो जारी कर खुद को कांग्रेस के साथ बताया।

साहू ने दावा किया कि वे पहले भी कांग्रेस में थे और अब भी कांग्रेस में ही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दबाव और धमकी के बीच भाजपा में शामिल कराया गया था।

उनके इस बयान से केकड़ी की स्थानीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। निकाय चुनाव से ठीक पहले उनका राजनीतिक यू-टर्न दोनों दलों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।

राजाखेड़ा में सगे भाई एक ही वार्ड से मैदान में

धौलपुर की राजाखेड़ा नगर पालिका में चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां वार्ड-22 से सगे भाई मुनेंद्र और श्रीकांत ने नामांकन दाखिल किया है।

एक ही परिवार के दो भाइयों की एक ही वार्ड से दावेदारी के कारण स्थानीय स्तर पर इस सीट की चर्चा तेज हो गई है। चुनाव आगे बढ़ने के साथ यह भी साफ होगा कि दोनों चुनाव मैदान में बने रहते हैं या किसी स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदलते हैं।

अजमेर में पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत की पत्नी निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी में

अजमेर में भी भाजपा को बगावत का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे चुके पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमलता गहलोत को निर्दलीय चुनाव लड़ाने की तैयारी कर ली है।

धर्मेन्द्र गहलोत भाजपा के पुराने नेताओं में रहे हैं। ऐसे में उनकी पत्नी की निर्दलीय दावेदारी संबंधित वार्ड में भाजपा के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।

ज्ञान सारस्वत और बेटी हर्षिता ने भी लिया फॉर्म

भाजपा से बागी होकर पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़ चुके ज्ञान सारस्वत ने भी निकाय चुनाव में निर्दलीय उतरने की तैयारी की है। उनके साथ उनकी बेटी हर्षिता सारस्वत ने भी अलग वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म लिया है।

इससे अजमेर में टिकट वितरण से पहले ही भाजपा के सामने पुराने नेताओं और बागियों को साधने की चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है।

बगावत रोकना भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

नगर निकाय चुनाव में टिकट के लिए हर वार्ड से कई दावेदार सामने आने के कारण भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन के साथ असंतुष्ट नेताओं को साधना भी महत्वपूर्ण हो गया है।

यही वजह मानी जा रही है कि पार्टी सार्वजनिक सूची जारी करने के बजाय प्रत्याशियों को सीधे जिला स्तर पर सिंबल देने जैसे विकल्प पर काम कर रही है। हालांकि उम्मीदवारों के नाम अंतिम होते ही स्थानीय स्तर पर विरोध या निर्दलीय दावेदारी सामने आने की संभावना बनी रहेगी।

टिकट वितरण के बीच भीलवाड़ा में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा, केकड़ी में कमलेश साहू का यू-टर्न और अजमेर में पुराने भाजपा नेताओं की निर्दलीय दावेदारी ने निकाय चुनाव को और रोचक बना दिया है।

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