



जयपुर। जयपुर में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी राजस्थान मंडपम परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। टोंक रोड पर बीटू बाईपास और सांगानेर के बीच जयपुर-सवाई माधोपुर रेलवे लाइन के पास प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र में पहले से संचालित जेम स्टोन पार्क की 11 औद्योगिक इकाइयों को रीको ने 30 अगस्त तक जगह खाली करने का नोटिस दिया है।
नोटिस मिलने के बाद जेम स्टोन कारोबार से जुड़े उद्यमियों और यहां काम करने वाले श्रमिकों में चिंता बढ़ गई है। उद्यमियों ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को बचाने की मांग की है।
राज्य सरकार ने दिल्ली के भारत मंडपम की तर्ज पर जयपुर में करीब 105 एकड़ जमीन पर राजस्थान मंडपम विकसित करने की घोषणा की है। इसे बड़े सम्मेलन, प्रदर्शनियों, व्यापारिक आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के लिए विकसित करने की योजना है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 5,800 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसके तहत करीब 2,268 करोड़ रुपए के कार्यों के लिए टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं।
जेम स्टोन पार्क के उद्यमियों का कहना है कि वे राजस्थान मंडपम परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इतने बड़े परियोजना क्षेत्र में मौजूदा जेम स्टोन उद्योग के लिए भी स्थान सुरक्षित रखा जाए।
जेम पार्क के उद्यमी राजेश वधवा के मुताबिक राजस्थान मंडपम के लिए 105 एकड़ से अधिक क्षेत्र उपलब्ध है। ऐसे में करीब 10 हजार वर्गमीटर क्षेत्र जेम स्टोन पार्क के लिए सुरक्षित रखकर दोनों परियोजनाओं को साथ विकसित किया जा सकता है।
रीको के नोटिस के बाद जेम स्टोन पार्क में संचालित 11 इकाइयों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उद्यमियों का कहना है कि इन इकाइयों से केवल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में श्रमिक और उनके परिवार भी जुड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा इकाइयों को पूरी तरह हटाने के बजाय सरकार को ऐसा समाधान तलाशना चाहिए, जिससे राजस्थान मंडपम का निर्माण भी प्रभावित न हो और वर्षों से संचालित जेम स्टोन उद्योग भी सुरक्षित रहे।
इस क्षेत्र को लेकर पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग परियोजनाओं की घोषणाएं सामने आती रही हैं। 2023 में फिनटेक पार्क, 2024 में यूनिटी मॉल और अब 2026 में राजस्थान मंडपम परियोजना के चलते यहां संचालित औद्योगिक इकाइयों के भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।
जेम पार्क की इकाइयों को हटाने का विवाद नया नहीं है। वर्ष 2015 में भी यहां संचालित इकाइयों को हटाने की कोशिश की गई थी। हालांकि मामला कोर्ट ऑफ स्टेट ऑफिसर्स में लंबित होने के कारण उस समय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब रीको की ओर से एक बार फिर 30 अगस्त तक जगह खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद मामला गरमा गया है।
उद्यमियों और श्रमिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर अपनी इकाइयों और रोजगार को बचाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि राजस्थान मंडपम जैसी बड़ी परियोजना प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके निर्माण के दौरान पहले से संचालित उद्योगों और उनसे जुड़े रोजगार का भी संरक्षण किया जाना चाहिए। अब निगाह राज्य सरकार और रीको के अगले कदम पर है कि 30 अगस्त की समयसीमा से पहले जेम स्टोन पार्क की 11 इकाइयों को कोई राहत मिलती है या उन्हें स्थान खाली करना पड़ेगा।