



जयपुर। राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी में टिकट की दावेदारी ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। पार्टी के पास अब तक पार्षद पद के लिए 45 हजार से ज्यादा आवेदन पहुंच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा दावेदारी जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए सामने आई है।
भाजपा की चुनाव संचालन कमेटी ने अब आवेदन प्रक्रिया के बाद संभावित प्रत्याशियों को लेकर जिलों से फीडबैक जुटाना शुरू कर दिया है। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में निकायवार स्थिति पर चर्चा की गई और जिला इकाइयों से वार्डवार दावेदारों की सक्रियता, संगठन में योगदान, स्थानीय पकड़ और चुनाव जीतने की क्षमता से जुड़ी जानकारी मांगी गई।
प्रदेश में इस बार 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 253 नगर पालिकाओं के लिए चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भाजपा के लिए बड़े संगठनात्मक अभ्यास के रूप में सामने आई है।
पार्टी का प्रयास है कि टिकट वितरण के दौरान स्थानीय संगठन की राय को भी पर्याप्त महत्व दिया जाए, ताकि वार्ड के वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर प्रत्याशी चुने जा सकें।
पार्टी सूत्रों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण फीडबैक और जमीनी आकलन का है।
जिला स्तर पर यह देखा जा रहा है कि किस वार्ड में कौन दावेदार जनता के बीच ज्यादा सक्रिय है, किसकी सामाजिक स्वीकार्यता मजबूत है और कौन प्रत्याशी भाजपा के लिए चुनावी तौर पर बेहतर परिणाम दे सकता है। टिकट चयन में स्थानीय जातीय-सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक निष्ठा, वार्ड में जनसंपर्क और जीत की संभावना को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
प्रदेश के निकायों में सबसे ज्यादा दावेदारी जयपुर नगर निगम से सामने आई है। यहां 150 वार्डों के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने आवेदन किया है। इससे पार्टी के सामने टिकट चयन की चुनौती और भी बढ़ गई है। कई वार्डों में एक टिकट के लिए अनेक मजबूत दावेदार होने के कारण स्थानीय संगठन, सर्वे और नेतृत्व के फीडबैक का महत्व बढ़ गया है।
निकाय चुनावों में युवा मतदाताओं, खासकर जेन-जी तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा ने युवा मोर्चा के साथ भी अलग रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय महामंत्री एवं निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी ने सोमवार को भाजयुमो के प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इसमें चुनाव प्रचार, डिजिटल कैंपेन, जनसंपर्क और चुनाव प्रबंधन से जुड़े कई कार्य युवाओं की टीम को सौंपने पर चर्चा हुई।
भाजपा का मानना है कि युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पारंपरिक प्रचार के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी होगा। युवा मोर्चा को वार्ड और बूथ स्तर पर सोशल मीडिया संवाद, स्थानीय मुद्दों पर कंटेंट, घर-घर संपर्क और युवा मतदाताओं से संवाद जैसी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
45 हजार से अधिक आवेदन पार्टी के लिए उत्साह का संकेत तो हैं, लेकिन इसके साथ टिकट वितरण के बाद असंतोष और बगावत की संभावना भी बड़ी चुनौती बन सकती है। भाजपा नेतृत्व की रणनीति ऐसे चेहरों को मैदान में उतारने की है, जिनकी वार्ड में मजबूत पकड़, संगठन के प्रति निष्ठा, सामाजिक स्वीकार्यता और चुनाव जीतने की क्षमता स्पष्ट हो।
भाजपा का फोकस केवल पार्षद सीटें जीतने तक सीमित नहीं है। पार्टी का लक्ष्य अधिक से अधिक नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में अपना बोर्ड बनाने का है। इसी वजह से प्रत्याशी चयन में ‘जिताऊ चेहरे’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। संगठन की स्थानीय रिपोर्ट, जिला इकाइयों का फीडबैक और चुनावी संभावनाओं को मिलाकर अंतिम टिकट तय किए जाएंगे।