



जयपुर। भारत की अध्यक्षता में शुक्रवार को जयपुर में संपन्न हुई ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक में ‘जयपुर घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से अपनाया गया। यह घोषणापत्र ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच पर्यटन सहयोग को मजबूत करने, तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, सतत पर्यटन, कौशल विकास और निर्बाध यात्रा सुविधा के लिए महत्वपूर्ण ढांचे के रूप में काम करेगा।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की। यह बैठक वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता में चल रहे ब्रिक्स पर्यटन ट्रैक का समापन भी रही, जिसकी थीम ‘अनुकूलनीयता, नवाचार, सहयोग और संवहनीयता का निर्माण’ रखी गई थी।
बैठक में ब्रिक्स के नौ सदस्य देशों ने भाग लिया। इनमें ब्राजील के पर्यटन मंत्री गुस्तावो कोस्टा फेलिसियांडो, ईरान के सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन एवं हस्तशिल्प मंत्री रजा सालेही अमीरी, दक्षिण अफ्रीका की पर्यटन मंत्री पेट्रिशिया डी लिले और संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तऊक अल मारी शामिल रहे।
इसके अलावा चीन, इथोपिया, इंडोनेशिया और रूस के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख भी बैठक में मौजूद थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार, संयुक्त सचिव हरिकिशोर एस. तथा अन्य अधिकारी शामिल हुए।
जयपुर घोषणापत्र भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स पर्यटन कार्य समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर हुए कार्य को आगे बढ़ाता है। इनमें एआई और पर्यटन, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन कौशल और क्षमता निर्माण तथा पर्यटन आदान-प्रदान और निर्बाध यात्रा सुविधा शामिल हैं।
घोषणापत्र में पर्यटन क्षेत्र में जिम्मेदार, सुरक्षित और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका को स्वीकार किया गया है।
ब्रिक्स देशों ने पर्यटन योजना, डेस्टिनेशन मैनेजमेंट, आगंतुक सेवाओं, बहुभाषी संचार और यात्रा सुविधा में डिजिटल तकनीक तथा एआई के सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया। सदस्य देशों ने माना कि तकनीक का उपयोग पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ पर्यटन सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बना सकता है।
जयपुर घोषणापत्र में सतत और समुदाय-केंद्रित पर्यटन को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास और विविध पर्यटन उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही कौशल विकास, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच साझेदारी, पर्यटन डेटा और आंकड़ों के आदान-प्रदान तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर भी जोर दिया गया।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में पर्यटन की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह विकास को बड़े आर्थिक केंद्रों से निकालकर कस्बों, गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक ले जा सकता है। शेखावत ने कहा कि पर्यटन होटल, होमस्टे, टैक्सी ऑपरेटर, गाइड, कारीगर, बुनकर, किसान, उद्यमी और लाखों परिवारों के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा करता है। उन्होंने कहा, “पर्यटन अंततः लोगों को जोड़ता है। यह समुदायों के लिए अवसर पैदा करता है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को संभव बनाता है।”
शेखावत ने भारत के उस पर्यटन मॉडल पर भी जोर दिया, जिसमें आर्थिक समृद्धि के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी, तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक प्रामाणिकता को समान महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल सरकारों के बीच औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह अलग-अलग देशों के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति और जीवन शैली को समझने का अवसर देता है।
ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने ब्राजील, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में संबंधित देशों के साथ पर्यटन सहयोग, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भविष्य की साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की पारंपरिक कला, शिल्प और समुदाय आधारित पर्यटन पहलों से भी परिचित कराया गया।
शनिवार, 22 अगस्त को मंत्री और प्रतिनिधि हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किला सहित जयपुर के प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण करेंगे। इससे उन्हें शहर की स्थापत्य, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। जयपुर घोषणापत्र के साथ राजस्थान की राजधानी का नाम अब ब्रिक्स देशों के पर्यटन सहयोग से जुड़े एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज से जुड़ गया है।