



जयपुर। राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही 20 अगस्त को सुबह 11 बजे विपक्ष की गैर मौजूदगी में शुरू हुई। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन की कार्यवाही प्रारंभ करते हुए पूर्व में दिवंगत नेताओं, पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों के निधन पर श्रद्धांजलि का प्रस्ताव रखा। इसके बाद सदन की कार्यवाही शुक्रवार, 21 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सत्र के पहले दिन सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयक भी पुरस्थापित किए गए। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय, जयपुर विधेयक पुरस्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जबकि संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान ट्रीज प्रोटेक्शन बिल-2026 को सदन में पुरस्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
राष्ट्रीय लोकदल के विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने विधेयकों को पुरस्थापित किए जाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कार्य सलाहकार समिति की बैठक से पहले सदन में विधेयकों को पुरस्थापित करने की परंपरा उचित नहीं है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उनकी आपत्ति को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सदन में फिलहाल विधेयक केवल पुरस्थापित किए गए हैं।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस विधायकों की गैर मौजूदगी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सदन में उपस्थित न देखकर उन्हें पीड़ा हो रही है।देवनानी ने सदन को बताया कि मार्शल ने कांग्रेस विधायकों से एक-एक कर गेट से अंदर आने का आग्रह किया था, लेकिन वे अंदर आने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और सदन में सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों की भागीदारी से ही सार्थक चर्चा संभव हो पाती है।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह खेद का विषय है कि विपक्षी सदस्य बिना किसी सूचना के सदन से गैर हाजिर हैं।
पटेल ने कहा कि विधानसभा जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और विपक्ष को अपनी बात सदन के भीतर रखनी चाहिए। विधानसभा के बाहर कांग्रेस विधायकों के धरने और भीतर विपक्ष की खाली सीटों के बीच मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक टकराव के माहौल में शुरू हुआ।