



जयपुर। राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री पर तीखा हमला बोला। जूली ने कहा कि कांग्रेस सदन चलाना चाहती है, लेकिन विधायकों को विधानसभा के भीतर जाने से रोका गया। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस देगी।
जूली ने कहा कि एक दिन पहले सर्वदलीय बैठक में उन्होंने स्वयं भरोसा दिलाया था कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलेगी। इसके बावजूद जिस गेट से विधायक वर्षों से विधानसभा में प्रवेश करते आए हैं, उसे बंद कर दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस विधायक सुबह पोद्दार मूक-बधिर स्कूल गए थे, लेकिन वहां उन्हें नोटिस दिखाकर अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके बाद विधायक पैदल मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचे, लेकिन यहां भी उन्हें रोक दिया गया। जूली ने सवाल किया कि जब विधायक सदन की कार्यवाही में शामिल होने आ रहे थे तो उन्हें विधानसभा के प्रवेश द्वार पर क्यों रोका गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को कांग्रेस विधानसभा के भीतर भी उठाएगी।
जूली ने स्कूलों में मीडिया प्रवेश से जुड़े नियमों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा अपने कथित गलत काम छिपाने के लिए ऐसा कानून लेकर आई है। उन्होंने इसे 'ढक्कन कानून' बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने आने से रोकना चाहती है।
टीकाराम जूली ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि 3,768 स्कूल जर्जर घोषित किए गए थे, लेकिन इनमें से एक भी स्कूल पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया।उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 85 हजार कमरे जर्जर स्थिति में हैं और उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं किया गया है। जूली ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में करीब सवा लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और पिछले तीन वर्षों में लगभग 9 लाख बच्चे सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं।
जूली ने पिपलोदी के स्कूल हादसे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल के गिरने से सात बच्चों की मौत हुई थी, उसका निर्माण भी अब तक पूरा नहीं किया गया।उन्होंने सवाल किया कि इतनी गंभीर घटनाओं और स्कूलों की बदहाल स्थिति के बावजूद सरकार की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षा मंत्री के पूर्व बयानों का जिक्र करते हुए उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कभी महिला शिक्षकों के पहनावे पर टिप्पणी की जाती है, कभी महिलाओं के मोबाइल जांचने जैसी बातें सामने आती हैं और कभी आदिवासियों के डीएनए टेस्ट से जुड़े बयान दिए जाते हैं। जूली ने तंज कसते हुए कहा, "ये शिक्षा मंत्री हैं या मजाक है।"
जब जूली से पूछा गया कि सरकारी स्कूलों की बदहाली की समस्या लंबे समय से चली आ रही है और कांग्रेस सरकार के समय भी स्कूलों की स्थिति खराब थी, तो उन्होंने इस तर्क को खारिज किया।
जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से शिक्षा का स्तर सुधारने, स्कूल भवन बनाने और सुविधाएं बढ़ाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने मरम्मत और बुनियादी ढांचे के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया, जिससे हालात बिगड़े हैं। मानसून सत्र के पहले दिन ही शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के भीतर भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख कारण बन सकता है।