Wednesday, 19 August 2026

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से, अवधि को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने


राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से, अवधि को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

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विपक्ष चाहता है 15-20 दिन चले सदन, सरकार 25 अगस्त तक सीमित रखने के पक्ष में, UCC और खेजड़ी संरक्षण विधेयक पर रह सकती है नजर

जयपुर। राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सदन की अवधि को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए। विपक्ष ने सत्र को कम से कम 15 से 20 दिन चलाने की मांग रखी, जबकि सत्ता पक्ष चुनावी माहौल और संभावित आचार संहिता को देखते हुए इसे अपेक्षाकृत छोटा रखने के पक्ष में है।बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और विपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान ने मांग की कि सदन को पर्याप्त समय तक चलाया जाए, ताकि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कर सके।

सरकार 25 अगस्त तक सत्र चलाने के पक्ष में

सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार मानसून सत्र को 25 अगस्त तक चलाने के पक्ष में है। यानी सदन की कार्यवाही करीब 4 से 5 दिन तक चल सकती है।सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में विधानसभा सत्र की अवधि और संभावित बिजनेस पर चर्चा हुई है। विपक्ष की ओर से भी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग रखी गई है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए सत्र के लंबा चलने की संभावना कम है। अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष और सरकार मिलकर करेंगे।

20 अगस्त को BAC बैठक में तय होगी अवधि

मानसून सत्र की वास्तविक अवधि और कार्यसूची पर अंतिम फैसला 20 अगस्त को होने वाली बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में लिया जाएगा।इसी बैठक में यह तय होगा कि कौन-कौन से विधेयक किस दिन पेश किए जाएंगे, किन मुद्दों पर चर्चा होगी और सदन कितने दिनों तक चलेगा।

UCC विधेयक पर सबसे ज्यादा नजर

इस मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। सरकार की ओर से UCC विधेयक सदन में पेश किए जाने की तैयारी है। विपक्ष इसे लेकर सरकार को घेर सकता है। ऐसे में इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस होने की संभावना है।

खेजड़ी संरक्षण के लिए ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की तैयारी

राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई को लेकर लंबे समय से उठ रही मांगों के बीच सरकार ट्री प्रोटेक्शन एक्ट से जुड़ा विधेयक भी सदन में ला सकती है।यदि यह विधेयक पेश होता है तो खेजड़ी सहित महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए कानूनी प्रावधानों को मजबूत करने का रास्ता खुलेगा।

कमर्शियल टैक्सेशन के संशोधन विधेयक भी संभव

मानसून सत्र में वाणिज्यिक कराधान यानी कमर्शियल टैक्सेशन से जुड़े संशोधन विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं।हालांकि चुनावी माहौल और आचार संहिता के कारण सरकार की ओर से बड़ी नीतिगत घोषणाओं की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।

विपक्ष ने मांगा ज्यादा समय

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और रफीक खान ने सर्वदलीय बैठक में जोर देकर कहा कि जनहित के मुद्दों, कानून व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और अन्य विषयों पर चर्चा के लिए सदन को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। विपक्ष की मांग है कि मानसून सत्र कम से कम 15 से 20 दिन चले, ताकि विभिन्न विभागों और सरकार की नीतियों पर विस्तार से चर्चा हो सके।

देवनानी बोले- नियमों के तहत विपक्ष रख सकेगा मुद्दे

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सदन को शांतिपूर्वक चलाने पर सहमति बनी है।उन्होंने कहा कि सदन और आसन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। गलत और असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल से बचने पर भी सहमति बनी है। देवनानी ने कहा कि विपक्ष यदि नियमों के अनुरूप जनहित के मुद्दे सदन में उठाता है तो उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा।

चुनावी माहौल में छोटा रह सकता है सत्र

प्रदेश में आगामी निकाय चुनावों की प्रक्रिया तेज होने के कारण इस बार मानसून सत्र सामान्य से छोटा रहने की संभावना जताई जा रही है।सत्ता पक्ष का तर्क है कि चुनावी गतिविधियों के बीच सदन का लंबा संचालन व्यावहारिक नहीं होगा, जबकि विपक्ष इसे सरकार द्वारा चर्चा से बचने की कोशिश के रूप में देख सकता है। अब सभी की नजर 20 अगस्त की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक पर रहेगी, जहां सत्र की अवधि और विस्तृत एजेंडा तय होगा।

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