Friday, 14 August 2026

सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन के पीएफ मामले में EPFO सख्त, दो साल से लंबित जांच पर विभागीय प्रतिनिधियों पर ₹2 हजार जुर्माना


सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन के पीएफ मामले में EPFO सख्त, दो साल से लंबित जांच पर विभागीय प्रतिनिधियों पर ₹2 हजार जुर्माना

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Case No. 179/23 में कंपनी ने अब तक नहीं दिए पूरे रिकॉर्ड ROC और आयकर विभाग से दस्तावेज जुटाकर निष्कर्षात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश, 18 अगस्त को ऑनलाइन सुनवाई

लखनऊ सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े पीएफ मामले में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), लखनऊ ने दो साल से अधिक समय से लंबित जांच को लेकर सख्त रुख अपनाया है। Case No. 179/23 में 11 अगस्त 2026 को हुई कार्यवाही के दौरान जांच की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए विभागीय प्रतिनिधियों पर ₹2,000 का जुर्माना लगाया गया। साथ ही अगली सुनवाई से पहले शेष रिकॉर्ड जुटाकर मामले में निष्कर्षात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्यवाही में प्रतिष्ठान की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि अधिवक्ता बीएम त्रिपाठी, विभाग की ओर से ईओ सुहैल खान, एओ सुमित सोनी और शिकायतकर्ता जोसेफ भूषण एंड्रयूज उपस्थित रहे।

शिकायतों के आधार पर शुरू हुई थी जांच

विभाग की ओर से बताया गया कि विभिन्न शिकायतकर्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। मामले से संबंधित पूरी फाइल देखने के बाद सामने आया कि प्रतिष्ठान की ओर से अभी तक सभी आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

हालांकि कंपनी ने कुछ रिकॉर्ड ई-मेल के माध्यम से भेजे हैं। विभाग की ओर से इन दस्तावेजों का विश्लेषण करने और रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल I.A. की कॉपी भी मांगी

सुनवाई के दौरान प्रतिष्ठान के अधिवक्ता बी.एम. त्रिपाठी ने बताया कि प्रतिष्ठान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में I.A. (इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन) दाखिल की गई है।

ईपीएफओ कार्यालय ने प्रतिष्ठान को पूर्व में इस आईए की प्रति कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक इसकी प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में प्रतिष्ठान को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आईए की कॉपी ईपीएफओ कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

दो साल से ज्यादा समय से जांच लंबित, अधिकारी ने जताई नाराजगी

कार्यवाही के दौरान विभागीय जांच की प्रगति को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की गई। विभाग के स्क्वॉड को पहले ही जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन न तो रिपोर्ट पेश की गई और न ही जांच की स्थिति को लेकर कोई रिपोर्ट दी गई।

अधिकारी ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जांच दो वर्ष से अधिक समय से लंबित है और विभागीय स्क्वॉड ने इसे अपेक्षित गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया। इसी के चलते Department Representatives पर ₹2,000 का जुर्माना लगाया गया।

ROC और आयकर विभाग से रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश

अब Department Representative को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिष्ठान से नहीं मिल पाए शेष रिकॉर्ड और दस्तावेज रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) और/या आयकर विभाग से प्राप्त किए जाएं।

इन दस्तावेजों के साथ पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच और विश्लेषण कर मामले में निष्कर्षात्मक रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कंपनी से पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलने की स्थिति में अब विभाग को अन्य सरकारी संस्थाओं से उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ानी है।

18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को दोपहर में वर्चुअल मोड से होगी। अगली सुनवाई में विभाग की निष्कर्षात्मक रिपोर्ट, आरओसी अथवा आयकर विभाग से प्राप्त रिकॉर्ड और कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आईए की प्रति महत्वपूर्ण रह सकती है।

लंबे समय से लंबित इस मामले में अब अगली सुनवाई पर नजर रहेगी कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ईपीएफओ जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।

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