Wednesday, 12 August 2026

विकसित भारत के लिए ग्रामीण शिल्पकारों का सशक्तिकरण जरूरी: नाबार्ड राजस्थान ने मनाया 12 वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस


विकसित भारत के लिए ग्रामीण शिल्पकारों का सशक्तिकरण जरूरी: नाबार्ड राजस्थान ने मनाया 12 वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

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राजस्थान के 10,090 बुनकर हथकरघा क्षेत्र से जुड़े, नाबार्ड ने 23 उत्पादों के जीआई पंजीकरण में की पहल, पद्मश्री राम किशोर छीपा ने सप्ताह में एक दिन हथकरघा वस्त्र पहनने का किया आह्वान

जयपुर। नाबार्ड राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय ने ‘विकसित भारत के लिए ग्रामीण शिल्पकारों का सशक्तिकरण’ विषय के साथ 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया। कार्यक्रम का उद्घाटन नाबार्ड राजस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. आर रवि बाबू और पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध बगरू शिल्पकार राम किशोर छीपा ने किया।

कार्यक्रम में हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को मजबूत करने, शिल्पकारों की आय बढ़ाने, नई तकनीक और डिजाइन को अपनाने, ऋण तथा बाजार तक पहुंच बढ़ाने और राजस्थान की पारंपरिक शिल्प विरासत के संरक्षण पर मंथन किया गया।

देश में 35 लाख परिवार हथकरघा से जुड़े

डॉ. आर. रवि बाबू ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति से जुड़ा है, जिसने स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का पहला आयोजन वर्ष 2015 में चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।

हथकरघा गणना 2019-20 का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश में करीब 35 लाख परिवार हथकरघा गतिविधियों से जुड़े हैं, जबकि राजस्थान में 10,090 बुनकर इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। इनमें महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और देश की पारंपरिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राजस्थान के 23 उत्पादों के जीआई पंजीकरण में नाबार्ड की पहल

डॉ. रवि बाबू ने बताया कि नाबार्ड कृषि के साथ गैर-कृषि क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित कर समेकित ग्रामीण विकास की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने राजस्थान के 23 उत्पादों के जीआई पंजीकरण एवं अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकरण, ग्रामीण मार्ट, ग्रामीण हाट, उत्पादक संगठनों के संवर्धन, प्रदर्शनियों तथा कौशल एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रमों जैसी नाबार्ड की विभिन्न पहलों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि शिल्पकारों की आय बढ़ाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित करने के लिए तकनीकी उन्नयन, डिजाइन में नवाचार, ऋण की उपलब्धता, मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

बगरू प्रिंट और चंदेरी साड़ियों के फ्यूजन का दिया उदाहरण

पद्मश्री राम किशोर छीपा ने देश की विभिन्न हथकरघा परंपराओं के बीच समन्वय और नवाचार की आवश्यकता बताई। उन्होंने बगरू प्रिंट और चंदेरी साड़ियों के फ्यूजन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के साथ शिल्पकारों के लिए नए बाजार भी तैयार कर सकते हैं।

उन्होंने लोगों से भारतीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सप्ताह में कम से कम एक दिन हथकरघा वस्त्र पहनने की अपील की।

तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़ने पर मंथन

कार्यक्रम में शिल्पकारों द्वारा नई तकनीक अपनाने, डिजाइन नवाचार, शिल्पकार संगठनों को मजबूत करने और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से संबंधित योजनाओं, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार साझा किए। वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, विपणन सहायता और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

संवाद सत्र में शिल्पकारों और अन्य हितधारकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए राजस्थान के हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के सतत विकास के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता बताई।

शिल्पकारों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस की संस्थापक एवं निदेशक अर्चना सुराणा, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार राज कुमार पाण्डेय, डॉ. संतोष कुमार धनोपिया सहित एसएलबीसी, विकास आयुक्त हस्तशिल्प, जिला उद्योग केंद्र और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

इसके अलावा विकास आयुक्त हथकरघा, केवीआईसी, ट्राइफेड, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिल्पकार समूहों और अन्य हितधारकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

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