Wednesday, 12 August 2026

शहीद अशोक जाट के स्मारक और स्कूल नामकरण की मांग को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 10 साल से कार्रवाई का इंतजार


शहीद अशोक जाट के स्मारक और स्कूल नामकरण की मांग को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 10 साल से कार्रवाई का इंतजार

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वजीराबाद के ग्रामीण तिरंगा लेकर पहुंचे टोंक कलक्ट्रेट, बोले—शहीद को सम्मान नहीं मिला तो करेंगे धरना, रोड जाम और विशाल रैली

टोंक। आजादी का अमृत महोत्सव और स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों के बीच टोंक जिले के वजीराबाद गांव के ग्रामीण एक दशक से शहीद अशोक कुमार जाट के सम्मान की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब 10 वर्षों से उन्हें स्मारक निर्माण और गांव के स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर किए जाने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन अब तक दोनों मांगें पूरी नहीं हुईं।

स्वतंत्रता दिवस से पहले वजीराबाद के ग्रामीण हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर टोंक पहुंचे। ग्रामीण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्मृति में बने गांधी पार्क से रैली के रूप में जिला कलक्ट्रेट पहुंचे और शहीद अशोक कुमार जाट का स्मारक बनवाने तथा गांव के स्कूल का नामकरण उनके नाम से करने की मांग उठाई।

2015 में सुकमा में हुए थे शहीद

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत पराना के वजीराबाद निवासी अशोक कुमार जाट केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 217वीं बटालियन में कार्यरत थे। वे 25 सितंबर 2015 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि शहादत को करीब 11 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक गांव में न तो शहीद का स्मारक बनाया गया और न ही स्थानीय विद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया गया।

अतिरिक्त जिला कलक्टर को सौंपा ज्ञापन

ग्रामीणों ने अतिरिक्त जिला कलक्टर विनोद मीणा को जिला कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि इस मांग को लेकर पहले भी कई बार जिला प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है और आश्वासन भी मिले, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने मांग की कि शहीद अशोक कुमार जाट का भव्य स्मारक शीघ्र बनाया जाए और गांव के स्कूल का नाम उनके नाम पर किया जाए। इसके साथ ही इन दोनों कार्यों को पूरा करने की निश्चित समय-सीमा घोषित कर ग्रामीणों को इसकी जानकारी देने की भी मांग की गई।

‘हमारी मांग केवल शहीद के सम्मान से जुड़ी’

ग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि उनकी मांग का किसी राजनीतिक दल या अन्य मुद्दे से कोई संबंध नहीं है। उनका उद्देश्य केवल गांव के वीर सपूत को उचित सम्मान दिलाना है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक निश्चित समय-सीमा के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन, रोड जाम और विशाल रैली जैसे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी भेजी प्रतिलिपि

ग्रामीणों ने ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सैनिक कल्याण बोर्ड, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक नई दिल्ली और सीआरपीएफ जीसी-2 अजमेर के महानिरीक्षक को भी भेजी है।

एडीएम बोले—मामले की जानकारी लेकर बताएंगे

अतिरिक्त जिला कलक्टर विनोद मीणा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि यह मामला अभी उनकी जानकारी में नहीं था। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में संबंधित प्रकरण की जानकारी लेकर ग्रामीणों को स्थिति से अवगत कराया जाएगा।

भाजपा नेता ने भी जताई नाराजगी

ज्ञापन देने पहुंचे ग्रामीणों के साथ मौजूद भाजपा की रमा चौधरी ने कहा कि यदि किसी शहीद के स्मारक और स्कूल के नामकरण जैसी मांग के लिए ग्रामीणों को आंदोलन करना पड़े तो यह उचित स्थिति नहीं है। उन्होंने मामले का शीघ्र समाधान कर शहीद को सम्मान दिलाने की मांग की।

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