



लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर बूथों की रेटिंग; कमजोर बूथों पर संगठन बढ़ाएगा फोकस
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा ने बूथ स्तर पर संगठनात्मक तैयारी तेज कर दी है। पार्टी प्रदेश के करीब 61 हजार बूथों का राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही है। इसके तहत प्रत्येक बूथ को पिछले लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर ए, बी, सी और डी श्रेणी में रखा जाएगा।
पार्टी का मानना है कि निकाय चुनाव में केवल सरकार की उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार की स्थानीय स्वीकार्यता, बूथ संगठन की सक्रियता और मतदाताओं तक लगातार पहुंच भी निर्णायक साबित होती है। इसी कारण सबसे मजबूत और सबसे कमजोर बूथों की पहचान कर पहले से रणनीति बनाई जा रही है।
रिपोर्ट कार्ड तैयार होने के बाद कमजोर बूथों पर संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है। इसके तहत बूथ समितियों के पुनर्गठन, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने, स्थानीय प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ाने और मतदाता संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।
संगठन बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, पिछले चुनावों के आंकड़े और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का भी आकलन करेगा। पार्टी का उद्देश्य है कि जिन क्षेत्रों में लगातार कमजोर प्रदर्शन रहा है, वहां चुनाव से पहले संगठनात्मक मौजूदगी मजबूत की जाए।
भाजपा की प्रस्तावित श्रेणी व्यवस्था के अनुसार ए श्रेणी में वे बूथ रखे जाएंगे, जहां पार्टी ने लोकसभा, विधानसभा और निकाय—तीनों चुनावों में जीत दर्ज की है। इन बूथों को पार्टी का सबसे मजबूत आधार माना जाएगा।
बी श्रेणी में वे बूथ शामिल होंगे, जहां भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव जीते, लेकिन निकाय चुनाव में पीछे रह गई। ऐसे बूथों पर स्थानीय उम्मीदवार, संगठन और नगर निकाय से जुड़े मुद्दों की अलग से समीक्षा की जाएगी।
सी श्रेणी उन बूथों की होगी, जहां पिछले तीन चुनावों में भाजपा केवल एक चुनाव जीत सकी और दो चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा। यहां संगठन को अधिक सक्रिय करने की जरूरत मानी जा रही है।
सबसे कमजोर डी श्रेणी में वे बूथ होंगे, जहां पार्टी लोकसभा, विधानसभा और निकाय—तीनों चुनाव हार चुकी है। इन बूथों को विशेष फोकस वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित कर स्थानीय स्तर पर नए समीकरण और संगठनात्मक रणनीति तैयार की जाएगी।
हाल के समय में युवाओं से जुड़े आंदोलनों, स्थानीय मुद्दों की बढ़ती गूंज और दूसरे राज्यों के उपचुनावों से मिले संकेतों के बाद पार्टी संगठन अधिक सतर्क रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। निकाय चुनाव में टिकट वितरण से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक हर स्तर पर डेटा आधारित तैयारी की जा रही है।
भाजपा का प्रयास है कि चुनाव से पहले कमजोर बूथों पर संगठन को मजबूत किया जाए और मजबूत बूथों पर बढ़त बरकरार रखी जाए। इसी रणनीति के तहत प्रदेशभर के बूथों का राजनीतिक और संगठनात्मक आकलन किया जा रहा है।